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बाढ़ पीड़ितों के लिए मुंगेर में बनी पहली टेंट सिटी! 50 बेड, दवा और बच्चों को दूध; पशुओं के इलाज की भी पूरी व्यवस्था

Published: Sun, 13 Sep 2026 06:36 PM (IST)

Munger Tent City Flood Relief Camp: गंगा के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित मुंगेर के बाढ़ पीड़ितों के लिए जिला प्रशासन ...और पढ़ें

Munger Tent City Flood Relief Camp: मुंगेर समाहरणालय के सामने बना पहला टेंट सिटी राहत केंद्र; बेड, मुफ्त इलाज और मवेशियों के चारे-दवा की सुविधा

Munger Tent City Flood Relief Camp: मुंगेर समाहरणालय के सामने बना पहला टेंट सिटी राहत केंद्र; बेड, मुफ्त इलाज और मवेशियों के चारे-दवा की सुविधा

HighLights

  1. मुंगेर में बाढ़ पीड़ितों के लिए पहली 'टेंट सिटी' स्थापित।

  2. 50 बेड, चिकित्सा, बच्चों को दूध और पशुओं का इलाज।

  3. जिला प्रशासन की संवेदनशीलता, सम्मानजनक राहत का प्रयास।

संवाद सहयोगी, मुंगेर। Munger Tent City Flood Relief Camp: गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के पानी से घर-आंगन डूबने के बाद सुरक्षित ठिकाने के लिए बेसहारा भटकने वाले मुंगेर के बाढ़ पीड़ितों को अब खुले आसमान के नीचे या सड़कों के किनारे रातें नहीं काटनी पड़ेंगी। जिला प्रशासन ने आपदा की इस घड़ी में संवेदनशीलता दिखाते हुए जिले में पहली बार एक सुव्यवस्थित 'टेंट सिटी' नुमा बाढ़ राहत केंद्र स्थापित किया है।

मुंगेर समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) के ठीक सामने स्थित केसी सुरेंद्र बाबू पार्क में रविवार से विधिवत रूप से इस केंद्र का संचालन शुरू कर दिया गया है। यहां बाढ़ से विस्थापित परिवारों के ठहरने के साथ-साथ उनके समुचित इलाज, खान-पान और छोटे बच्चों की जरूरी देखभाल की मुकम्मल व्यवस्था की गई है।

  • मुंगेर जिला प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए समाहरणालय के सामने केसी सुरेंद्र बाबू पार्क में तैयार की पहली आधुनिक टेंट सिटी

  • महिलाओं और पुरुषों के लिए 25-25 बेड के बनाए गए अलग-अलग विश्राम स्थल; निबंधन काउंटर पर पंजीकरण के बाद मिलेगा प्रवेश

  • स्वास्थ्य, आईसीडीएस और पशुपालन विभाग के लगे विशेष स्टाल; बच्चों को दूध, मरीजों को दवा और बीमार पशुओं का होगा उपचार

  • नोडल पदाधिकारी कमल कुमार ने दी जानकारी; जिला प्रभारी मंत्री संजय कुमार और प्रभारी सचिव पंकज कुमार पाल लेंगे जायजा

इस आधुनिक राहत केंद्र में अनुशासन और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए एक निबंधन (रजिस्ट्रेशन) काउंटर बनाया गया है। विस्थापित ग्रामीण पहले अपना पंजीकरण कराएंगे, जिसके बाद उन्हें विश्राम स्थल में जगह दी जाएगी। केंद्र के अंदर महिलाओं और पुरुषों के लिए पूरी गोपनीयता और सुरक्षा के साथ 25-25 बेड के अलग-अलग विश्राम स्थल (कुल 50 बेड) तैयार किए गए हैं, जहां पंखे, लाइट और बिछावन का पूरा प्रबंध है।

बच्चों को दूध, बीमारों को दवा और मवेशियों को इलाज

इस राहत केंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां पीड़ितों के साथ-साथ उनके मवेशियों की भी सुध ली गई है। परिसर में समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस), स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग के अलग-अलग स्टाल लगाए गए हैं:

  • आंगनबाड़ी शिविर (ICDS): यहां छोटे मासूम बच्चों के लिए शुद्ध और पौष्टिक दूध की नियमित व्यवस्था की गई है।

  • चिकित्सा शिविर (स्वास्थ्य विभाग): बाढ़ जनित बीमारियों, संक्रमण, बुखार और चोट से पीड़ित लोगों की प्राथमिक जांच और दवा वितरण के लिए डॉक्टरों की टीम तैनात है।

  • पशुपालन शिविर: बाढ़ में फंसे बेजुबान मवेशियों को भी राहत मिले, इसके लिए पशु चिकित्सकों की टीम बीमार पशुओं के प्राथमिक उपचार और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था देख रही है।

ये सभी स्टाल और शिविर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सक्रिय रूप से संचालित रहेंगे, ताकि एक ही छत के नीचे पीड़ित परिवार को अपनी और अपने मवेशियों की हर बुनियादी जरूरत का समाधान मिल सके।

प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव करेंगे निरीक्षण

बाढ़ राहत केंद्र के नोडल पदाधिकारी सह जिला पंचायती राज पदाधिकारी कमल कुमार ने बताया कि बाढ़ पीड़ित परिवारों की मानवीय जरूरतों और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए जिले में पहली बार इस प्रकार की मॉडल टेंट सिटी विकसित की गई है। इस पहल से पीड़ितों को राहत शिविरों में सम्मानजनक वातावरण मिलेगा। उन्होंने बताया कि व्यवस्था का जायजा लेने और राहत कार्यों की समीक्षा के लिए सोमवार को जिला प्रभारी मंत्री संजय कुमार और प्रभारी सचिव पंकज कुमार पाल केंद्र का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। उजड़े आशियानों के दर्द के बीच यह टेंट सिटी प्रभावित ग्रामीणों के लिए संबल और सुकून का केंद्र बन रही है।