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मुंगेर बनेगा बिहार का नया इको-टूरिज्म हब, भीमबांध के बाद देवघरा और ढोल पहाड़ी को संवारने की कवायद शुरू

Published: Sat, 26 Sep 2026 09:33 PM (IST)

मुंगेर अपने पहाड़, जंगल और प्राकृतिक संपदा के सहारे पर्यटन के नए मुकाम की ओर बढ़ रहा है, जिसमें इको ...और पढ़ें

मुंगेर बनेगा पर्यटन का हब। फोटो जागरण

मुंगेर बनेगा पर्यटन का हब। फोटो जागरण

मनीष कुमार, मुंगेर। ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक स्थलों के साथ अब मुंगेर अपने पहाड़, जंगल और प्राकृतिक संपदा के सहारे पर्यटन के नए मुकाम की ओर बढ़ रहा है।

जिले में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में कई स्थलों पर विकास कार्य शुरू किए गए हैं। भीमबांध में चल रहे इको टूरिज्म विकास कार्य के साथ टेटिया बंबर के देवघरा पहाड़ और असरगंज की ढोल पहाड़ी को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की पहल शुरू हो गई है।

इससे जिले के ग्रामीण और प्राकृतिक क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की उम्मीद जगी है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर भीमबांध लंबे समय से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है।

जंगल, पहाड़ और गर्म जलस्रोत यहां की विशिष्ट पहचान हैं। इको टूरिज्म के विकास से इस क्षेत्र को व्यवस्थित पर्यटन स्थल के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

देवघरा और ढोल पहाड़ी में भी खुलेगी पर्यटन की राह

टेटिया बंबर का देवघरा पहाड़ और असरगंज की ढोल पहाड़ी अब तक स्थानीय स्तर पर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जानी जाती रही हैं। इको टूरिज्म विकास कार्य शुरू होने से इन दोनों क्षेत्रों को पर्यटन के मानचित्र पर लाने की दिशा में कदम बढ़ा है।

पहाड़ी क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखते हुए पर्यटक सुविधाओं का विकास किया जा सके तो ये स्थल मुंगेर के ग्रामीण पर्यटन की नई पहचान बन सकते हैं।

इको टूरिज्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें प्रकृति के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी और रोजगार को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। ऐसे में इन स्थलों का विकास आसपास के गांवों की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

ऋषिकुंड से काली पहाड़ी तक बढ़ेगा आकर्षण

मुंगेर के ऋषिकुंड को भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाएं हैं। प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक आस्था से जुड़े इस क्षेत्र को अन्य पर्यटन स्थलों से जोड़कर आकर्षक सर्किट तैयार किया जा सकता है।

वहीं, जमालपुर की काली पहाड़ी भी पर्यटन की संभावनाओं वाला क्षेत्र है। इसके विकास से जमालपुर और मुंगेर के पर्यटन स्थलों को एक-दूसरे से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

एक सर्किट से बढ़ेगा ठहराव

भीमबांध, देवघरा पहाड़, ढोल पहाड़ी, ऋषिकुंड और काली पहाड़ी जैसे स्थलों को आपस में जोड़कर पर्यटन सर्किट विकसित करने की संभावनाएं हैं। इससे पर्यटकों के लिए एक स्थल तक सीमित रहने के बजाय कई स्थानों का भ्रमण करने का अवसर मिलेगा।

पर्यटकों का ठहराव बढ़ने पर होटल, परिवहन, खानपान, स्थानीय उत्पाद और गाइड जैसी सेवाओं में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह तस्वीर उम्मीद जगाती है कि जिले की प्राकृतिक संपदा अब केवल स्थानीय पहचान तक सीमित नहीं रहेगी।

योजनाबद्ध विकास, प्रकृति संरक्षण और बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ मुंगेर आने वाले समय में इको टूरिज्म के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

मुंगेर के भीमबांध, टेटिया बंबर के देवघरा पहाड़ी और ढ़ोल पहाड़ी को मुख्यमंत्री के निर्देश पर ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। खासकर भीमबांध वन्य जीव अभ्यारण क्षेत्र की योजना पर वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग विस्तृत योजना तैयार कर उसे विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। -निखिल धनराज निप्पाणीकर, डीएम