धरहरा के गालीबाज CO वीरेंद्र कुमार की बढ़ेगी मुश्किलें: ऑडियो वायरल होने के बाद एक्शन में मुंगेर DM, होगी जांच
धरहरा अंचल अधिकारी वीरेंद्र कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि गाली-गलौज का ऑडियो वायरल होने और भ्रष्टाचार की शिकायतों ...और पढ़ें

सोशल मीडिया पर गाली-गलौज का ऑडियो प्रसारित होने और लगातार शिकायतों के बाद जिलाधिकारी ने दिए जांच के आदेश
HighLights
सीओ वीरेंद्र कुमार के खिलाफ जांच के आदेश।
गाली-गलौज ऑडियो और भ्रष्टाचार की लगातार शिकायतें।
दाखिल-खारिज और राजस्व मामलों की होगी पड़ताल।
संवाद सहयोगी, धरहरा (मुंगेर)। धरहरा अंचल के अंचलाधिकारी (CO) वीरेंद्र कुमार की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ने वाली हैं। इंटरनेट मीडिया पर गाली-गलौज से जुड़ा एक कथित ऑडियो प्रसारित होने और भ्रष्टाचार की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर अब सीओ के पूरे कार्यकाल के दौरान हुए दाखिल-खारिज (म्यूटेशन), परिमार्जन और अन्य राजस्व मामलों की विस्तृत जांच कराई जाएगी।
वरीय अधिकारियों को प्राप्त पूर्व के सभी आवेदनों और शिकायतों को भी इस जांच के दायरे में शामिल किया गया है। जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए विभागीय कार्रवाई के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार को अनुशंसा भेजी जाएगी।
संचिका में हेरफेर और जमाबंदी विवाद में घिरे सीओ
धरहरा अंचल कार्यालय की कार्यशैली पर पहले भी गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं। पूर्व में एक निजी व्यक्ति द्वारा सरकारी संचिका (फाइल) में कथित तौर पर उलटफेर किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। अब वैध जमाबंदी रैयत की जमीन को नियम विरुद्ध तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम नामांतरण (दाखिल-खारिज) करने का नया आरोप लगा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल वायरल ऑडियो तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके कार्यकाल के दौरान निपटाए गए विवादित म्यूटेशन और परिमार्जन के सभी मामलों की गहन पड़ताल होगी।
आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद कर दिया दाखिल-खारिज
धरहरा प्रखंड के ईटवा निवासी दीपक कुमार मिश्रा ने जिलाधिकारी से लिखित शिकायत की है। उन्होंने बताया कि इटवा निवासी प्रेम शंकर सिन्हा के पूर्वज से उनके पूर्वज विशुनदेव मिश्रा ने 83 डिसमिल जमीन का विधिवत केवाला लिया था, जिसकी जमाबंदी लंबे समय से उनके नाम पर कायम है।
पीड़ित का गंभीर आरोप है कि वैध आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद सीओ वीरेंद्र कुमार ने नियमों को ताक पर रखकर प्रेम शंकर सिन्हा के आवेदन पर 3 डिसमिल जमीन के दाखिल-खारिज को मंजूरी दे दी।
