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मुंगेर में हल्की बारिश से स्कूल में 'पानी-पानी'; रास्तों पर भी 4 फीट तक भरा, स्टूडेंट की पढ़ाई पर संकट

Published: Mon, 20 Jul 2026 01:14 PM (IST)

मूसलाधार बारिश से मुंगेर के धरहरा प्रखंड में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, स्कूल और सड़कें जलमग्न होने से पढ़ाई ...और पढ़ें

HighLights

  1. धरहरा में मूसलाधार बारिश से स्कूल और सड़कें जलमग्न।

  2. अतिक्रमण के कारण घरों में घुसा पानी, दैनिक जीवन प्रभावित।

  3. ग्रामीणों ने स्थायी जलनिकासी और अतिक्रमण हटाने की मांग की।

संवाद सूत्र, धरहरा (मुंगेर)। मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। मूसलाधार बारिश के कारण क्षेत्र के शैक्षणिक संस्थानों से लेकर ग्रामीण इलाकों की बुनियादी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

महगामा में जलमग्न हुए विद्यालय

सोमवार को हुई भारी बारिश के चलते महगामा स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय के कई कमरों में अचानक करीब दो फीट तक पानी भर गया। कक्षाओं में जलभराव की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रबंधन को विद्यालय बंद करने का फैसला लेना पड़ा।

स्कूल जाने वाले रास्ते बंद

वहीं दूसरी ओर, कन्या मध्य विद्यालय महगामा को जोड़ने वाले मुख्य संपर्क मार्ग पर भी काफी गहराई तक पानी जमा हो गया है। हालांकि शिक्षक तो अपने तय समय पर विद्यालय पहुंच गए, परंतु जलमग्न रास्तों के कारण छात्राएं अपने घरों से नहीं निकल सकीं।

Munger Dharhara Schools Roads Waterlogged Life Disrupted

हर साल पढ़ाई होती प्रभावित

स्थानीय नागरिकों ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि हर वर्ष मानसून की पहली बारिश में विद्यालय परिसर और मुख्य रास्ते जलमग्न हो जाते हैं। इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण हर साल छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई महीनों तक बुरी तरह प्रभावित होती रहती है।

जलनिकासी की उठने लगी मांग

आक्रोशित ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से अविलंब संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने मांग उठाई है कि विद्यालय परिसर से पानी निकालने की आधुनिक व्यवस्था की जाए और मुख्य रास्तों को तुरंत दुरुस्त करके पढ़ाई फिर से शुरू कराई जाए।

नाला अतिक्रमण से बढ़ी आफत

दूसरी तरफ, मूसलाधार वर्षा के बीच औड़ाबगीचा पंचायत के वार्ड संख्या 4, 5 और 9 में नाले पर किए गए अवैध अतिक्रमण के कारण जलनिकासी का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। नाला जाम होने के कारण बारिश का गंदा पानी दर्जनों घरों में घुस गया है।

घरों के आंगन बने पोखरा

आंगन, कमरों और रसोई में बारिश व नाले का पानी भर जाने से लोगों के लिए दैनिक कार्य करना भी असंभव हो गया है। खाद्य सामग्री और गृहस्थी के सामान पानी में तैरने लगे हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों पर उपेक्षा के आरोप

प्रखंड उप प्रमुख नीरज यादव ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने बीते 8 जून को ही अंचलाधिकारी तथा अनुमंडल पदाधिकारी को लिखित आवेदन दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि अंचल प्रशासन समय रहते नाले को अतिक्रमण मुक्त करा देता, तो आज यह दुर्दशा नहीं होती।

स्थायी समाधान की उठी मांग

पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि हर साल मानसून के आगमन पर उन्हें यही यातना झेलनी पड़ती है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अंचल क्षेत्र के सभी नालों की उड़ाही कराने और अवैध कब्जे हटाकर पक्की जलनिकासी बनाने की मांग की है।

ग्रामीण रास्तों पर थमे पहिए

इतना ही नहीं, धरहरा प्रखंड के खजुरिया, अमारी श्रद्धापुर, बंगलवा और दशरथपुर समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर जलजमाव हो गया है। सड़कें कई फीट पानी में समा गई हैं, जिससे गांवों का आपस में संपर्क पूरी तरह टूट गया है।

जोखिम उठाकर चल रहे लोग

सड़कों के जलमग्न हो जाने के कारण स्कूली बच्चों, किसानों, दैनिक मजदूरों और आपातकालीन मरीजों को आने-जाने में जानलेवा जोखिम उठाना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालक बंद पड़ी जलमग्न सड़कों पर गिरकर चोटिल हो रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भय का माहौल व्याप्त है।

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