ASI हत्याकांड में 8 दोषी करार, कैदी वैन में तोड़फोड़ कर पुलिस पर हमला; हाजत प्रभारी समेत 3 घायल, अलग से केस दर्ज
मुंगेर कोर्ट ने डायल-112 के एएसआई संतोष कुमार सिंह हत्याकांड में आठ आरोपियों को दोषी ठहराया है, जिनकी सजा पर ...और पढ़ें

कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद कैदी वैन में बंदियों का उपद्रव; एसपी ने मौके पर पहुंच संभाली स्थिति
HighLights
एएसआई संतोष कुमार सिंह हत्याकांड में आठ दोषी करार।
कैदी वाहन में तोड़फोड़, हाजत प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मी घायल।
दोषियों की सजा पर 7 सितंबर को होगी सुनवाई।
जागरण संवाददाता, मुंगेर। मुंगेर व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ (ADJ-IV) कुमारी मनीषा की अदालत ने डायल-112 पर तैनात पुलिस पदाधिकारी (जमादार) संतोष कुमार सिंह हत्याकांड में सोमवार को अहम फैसला सुनाते हुए सभी आठ नामजद आरोपितों को दोषी करार दिया है। अदालत द्वारा दोषियों की सजा के बिंदु पर आगामी 7 सितंबर को सुनवाई की जाएगी।
इधर, अदालत से दोषी ठहराए जाने के बाद कैदियों को जब वापस जेल ले जाने के लिए कैदी वाहन में बैठाया गया, तो वे अचानक उग्र हो गए और जमकर गाली-गलौज व हंगामा शुरू कर दिया।
कैदी वैन का शीशा तोड़ा, बीच-बचाव में हाजत प्रभारी सहित 3 पुलिसकर्मी जख्मी
वाहन में बैठते ही आरोपितों ने एकाएक कैदी वाहन का शीशा तोड़ दिया और आपस में ही मारपीट करने लगे। गाड़ी के अंदर अफरातफरी मचती देख सेशन कोर्ट के हाजत प्रभारी विनोद कुमार तत्काल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कैदी वाहन में घुसे। वाहन में प्रवेश करते ही आरोपित उनसे उलझ गए और उन पर हमला बोल दिया।
बीच-बचाव करने पहुंचे पुलिसकर्मियों के साथ भी आरोपितों ने तीखी झड़प की। इस मारपीट में हाजत प्रभारी विनोद कुमार, सिपाही विनेंदश्वरी मांझी और महिला सिपाही निर्मला कुमारी जख्मी हो गईं। वहीं, कैदियों के आपस में भिड़ने के दौरान दो आरोपितों राजू कुमार और गुड्डू कुमार को भी हल्की चोटें आईं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक (SP) सैयद इमरान मसूद, कोतवाली थाना की पुलिस और क्विक रिस्पांस टीम (QRT) के साथ मौके पर पहुंचे और बल प्रयोग कर स्थिति को काबू में किया। सभी घायल पुलिसकर्मियों को फौरन इलाज के लिए मुंगेर सदर अस्पताल भेजा गया।
होली के दिन विवाद शांत कराने गए एएसआई को मार डाला था
अदालत में राज्य की ओर से बहस कर रहे लोक अभियोजक (PP) संजय कुमार सिंह ने बताया कि यह पूरा मामला 14 मार्च 2025 (होली के दिन) का है। दोपहर करीब 2:05 बजे मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने दो पक्षों में विवाद और मारपीट की सूचना डायल-112 को मिली थी। सूचना पर सहायक अवर निरीक्षक (ASI) संतोष कुमार सिंह सिपाही दीपक कुमार के साथ पहुंचे और मामला शांत कराया था।
उसी शाम करीब 7:30 बजे गश्ती के दौरान दोनों पक्ष फिर गाली-गलौज करने लगे। जमादार संतोष कुमार सिंह जब दूसरे पक्ष को समझाने उनके घर के आंगन में पहुंचे, तो वहां मौजूद राजीव कुमार, रणवीर कुमार, राजू कुमार, गुड्डू कुमार, विकास कुमार, रेखा देवी, सरिता देवी और मौसम कुमारी ने एकजुट होकर लोहे की रॉड, दबिया, हुक और लात-घूंसों से उन पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर हालत में उन्हें पारस अस्पताल, पटना ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। सिपाही दीपक कुमार के बयान पर दर्ज इस केस में अदालत ने सभी आठों को दोषी पाया है।
"कोर्ट परिसर में कैदी वाहन का शीशा तोड़ने, आपस में मारपीट करने तथा हाजत प्रभारी व सिपाहियों पर हमला करने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। पुलिसकर्मियों पर हमला और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में सभी संबंधित बंदियों पर अलग से सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है।"
