मुंगेर : बच्चा चोरी मामले में नया मोड़, गिरफ्तार हरजिंदर को चाहिए था बेटा; 4.5 घंटे में खुला खौफनाक साजिश का रहस्य
मुंगेर में तीन वर्षीय अभिराज के अपहरण का मामला साढ़े चार घंटे में सुलझा लिया गया, जिसमें पुलिस ने अंतरराज्यीय ...और पढ़ें

मुंगेर बच्चा चोरी मामले में नया मोड़, गिरफ्तार हरजिंदर को चाहिए था बेटा; 4.5 घंटे में पुलिस ने छीना मासूम
HighLights
मुंगेर पुलिस ने साढ़े चार घंटे में मासूम अभिराज को बचाया।
अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी गिरोह के छह सदस्य गिरफ्तार।
पड़ोसी नीरज निकला मास्टरमाइंड, 3.5 लाख में हुआ था सौदा।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। मुंगेर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत लालदरवाजा सेवासदन इलाके से मंगलवार को तीन वर्षीय मासूम अभिराज के अचानक गायब होने से पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी। जिस तरह से एक छोटे से बच्चे को उसके घर के पास से गायब किया गया, उससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया था।
हालांकि, मुंगेर पुलिस और पुलिस आसूचना इकाई की टीम ने अभूतपूर्व मुस्तैदी और त्वरित कार्रवाई का परिचय देते हुए इस खौफनाक अपहरण कांड की गुत्थी को महज साढ़े चार घंटे के भीतर पूरी तरह सुलझा लिया। पुलिस टीम ने अंतरराज्यीय सीमा को लांघकर भाग रहे किडनैपर्स का पीछा किया और पड़ोसी जिले भोजपुर के आरा शहर में घेराबंदी कर मासूम अभिराज को सकुशल बरामद कर लिया।
मासूम को सुरक्षित देखकर जहां उसके परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, वहीं पुलिस ने मौके से अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी और अपहरण गिरोह के कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही साजिश में इस्तेमाल एक नाबालिग को भी पुलिस ने अपने संरक्षण में लिया है।
अपराधियों के पास से घटना में प्रयुक्त लग्जरी कार और फिरौती व सौदेबाजी के दो लाख 20 हजार रुपये नकद भी जब्त किए गए हैं। गुरुवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान मुंगेर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सैयद इमरान मसूद ने इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले का विस्तृत खुलासा किया।
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सीसीटीवी फुटेज से हुआ खुलासा
मुंगेर एसपी सैयद इमरान मसूद ने घटनाक्रम की पूरी कड़ी से पर्दा उठाते हुए बताया कि मंगलवार की दोपहर पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि लालदरवाजा सेवासदन निवासी विनोद यादव (विनोद कुमार) के तीन वर्षीय पुत्र अभिराज का अज्ञात अपराधियों द्वारा अपहरण कर लिया गया है और उसे कार में बैठाकर पंजाब ले जाने की तैयारी है। मामला एक मासूम बच्चे के जीवन से जुड़ा होने के कारण पुलिस महकमे में तुरंत हड़कंप मच गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली थाना पुलिस और पुलिस आसूचना इकाई की एक विशेष जांच टीम गठित की गई।
ई-रिक्शा चालक पड़ोसी ही निकला मास्टरमाइंड
विशेष टीम ने तुरंत लालदरवाजा और आसपास के तमाम इलाकों में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। कई कैमरों की रिकॉर्डिंग को बार-बार देखने पर पुलिस को पीड़ित परिवार के पड़ोस में ही रहने वाले ई-रिक्शा चालक नीरज कुमार की गतिविधियां बेहद संदिग्ध दिखाई दीं। पुलिस ने बिना देर किए नीरज को हिरासत में लिया और जब उससे कड़ाई से पूछताछ शुरू की, तो वह टूट गया और उसने अपहरण की इस पूरी सुनियोजित खौफनाक साजिश का सच उगल दिया।
टॉफी का लालच देकर बच्ची से बुलवाया
पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, अपहरण की यह वारदात अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे पिछले एक महीने से बहुत गहरी साजिश और रेकी चल रही थी। मुख्य मास्टरमाइंड नीरज लगातार मासूम अभिराज की हर गतिविधि और उसके परिजनों की आवाजाही पर नजर रख रहा था। 12 अगस्त को जैसे ही उसे सही मौका मिला, उसने योजना के तहत अपनी ही नाबालिग बेटी को माध्यम बनाया। नीरज ने अपनी बेटी के जरिए मासूम अभिराज को टॉफी देने का लालच दिलवाया और उसे घर से कुछ दूरी पर स्थित सड़क की ओर बुलवा लिया।
सिग्नल मिलते ही कार में लादकर भागे
जैसे ही मासूम अभिराज सड़क पर पहुंचा, पहले से घात लगाकर तैयार खड़े मुख्य साजिशकर्ता नीरज ने पंजाब से आई किडनैपर्स की कार को रुकने का इशारा किया। कार रुकते ही मासूम को झपट्टा मारकर भीतर बैठा लिया गया और गाड़ी तेज रफ्तार में पंजाब की दिशा में आगे बढ़ गई। नीरज ने बच्चे को पंजाब से आए बच्चा तस्करों के हवाले कर दिया और खुद बेखबर बनने का नाटक करने लगा।
मुंगेर और भोजपुर पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन
मासूम को कार में बैठाकर भागने की सटीक जानकारी मिलते ही मुंगेर पुलिस ने तत्परता की मिसाल पेश की। पुलिस ने तुरंत तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट की मदद से उस संदिग्ध कार का रजिस्ट्रेशन नंबर और उसके भागने के संभावित रास्ते (रूट) को ट्रेस कर लिया। जांच में पता चला कि अपराधी कार से पटना-आरा राजमार्ग के रास्ते राज्य से बाहर निकलने की फिराक में हैं।
आरा में घेराबंदी कर बचाई गई जान
इसके बाद मुंगेर एसपी सैयद इमरान मसूद ने बिना एक पल गंवाए भोजपुर के पुलिस अधीक्षक से संपर्क साधा और स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया। भोजपुर पुलिस ने तुरंत पूरे आरा शहर और आसपास के मुख्य मार्गों पर नाकेबंदी और सघन वाहन जांच अभियान शुरू कर दिया। आरा में जैसे ही वह संदिग्ध कार दिखाई दी, भोजपुर पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेरकर रोक लिया। कार के भीतर मासूम अभिराज सुरक्षित बैठा हुआ था और उसके साथ पंजाब व बिहार के तस्कर भी मौजूद थे। इसके बाद मुंगेर से गई आसूचना इकाई और पुलिस की टीम आरा पहुंची और बच्चे को सुरक्षित अपनी कस्टडी में लेकर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर मुंगेर ले आई।
पंजाब और बेगूसराय के 6 आरोपी गिरफ्तार
मुंगेर एसपी ने बताया कि आरा से गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अंतरराज्यीय नेटवर्क के कई मुख्य चेहरे शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से पंजाब राज्य के जालंधर जिले के लोहियां थाना क्षेत्र स्थित लोहिया मोहल्ला निवासी राजकुमार और उसकी पत्नी हरजिंदर कौर शामिल हैं। इसके अलावा पंजाब के ही कपूरथला जिले के सिटी थाना क्षेत्र निवासी रमनजीत कौर और निर्मला कौर को भी रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
जानिए कौन-कौन हैं इसमें शामिल
इस गिरोह की मुख्य कड़ी के रूप में बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र (वार्ड संख्या 4) निवासी नीलम देवी और मुंगेर के लालदरवाजा निवासी स्थानीय मास्टरमाइंड नीरज कुमार को गिरफ्तार किया गया है। एसपी ने जानकारी दी कि प्राथमिक जांच में पकड़े गए इन सभी आरोपियों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास दर्ज नहीं मिला है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ये लोग पैसों के लालच में गिरोह बनाकर बच्चा तस्करी के इस काले कारोबार में उतरे थे।
इकलौते बेटे की मौत से अवसाद में थी महिला
पुलिस की गहन पूछताछ में इस दिल दहला देने वाले अपहरण के पीछे की जो मुख्य वजह सामने आई, वह बेहद अजीब और चौंकाने वाली है। गिरफ्तार महिला हरजिंदर कौर ने पुलिस को बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व उसके इकलौते बेटे की एक गंभीर बीमारी के कारण अकाल मौत हो गई थी। इकलौते चिराग के बुझ जाने के बाद से उसका पति मानसिक रूप से अस्वस्थ रहने लगा और घर में गहरा तनाव व्याप्त हो गया था।
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साढ़े 3 लाख में हुआ था सौदा
पंजाब स्थित हरजिंदर के घर में बेगूसराय के साहेबपुर कमाल निवासी नीलम देवी दाई (घरेलू सहायिका) का काम करती थी। नीलम ने हरजिंदर की इस मानसिक स्थिति का फायदा उठाया और उसे ढांढस बंधाते हुए कहा कि वह बिहार के मुंगेर जिले से अपने जान-पहचान के लोगों के जरिए एक छोटा बच्चा लाकर दे सकती है। इस काम के लिए दोनों पक्षों के बीच साढ़े तीन लाख रुपये में सौदा तय हुआ था।
पटना के होटल में रुके थे किडनैपर्स
साढ़े तीन लाख रुपये में बच्चा उपलब्ध कराने का सौदा तय होने के बाद नीलम देवी ने मुंगेर जिले के कासिम बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत नौलखा निवासी संगीता देवी से संपर्क साधा। संगीता देवी ने पैसों के लालच में आकर लालदरवाजा के स्थानीय निवासी और ई-रिक्शा चालक नीरज को इस घिनौने काम के लिए तैयार किया। सौदे के मुताबिक, संगीता ने नीरज को अग्रिम राशि के तौर पर एक लाख रुपये नकद भी दे दिए थे।
नौलखा की संगीता ने बिछाया था जाल
इसके बाद नीरज ने लगातार एक महीने तक अपने ही पड़ोसी के मासूम बच्चे की रेकी की। पूरी योजना तैयार होने के बाद, पंजाब से आए आरोपी 10 अगस्त को ही ट्रेन से पटना पहुंच गए थे और वहां एक होटल में ठहरे हुए थे। 12 अगस्त की दोपहर जैसे ही नीरज ने मुंगेर से हरी झंडी दी, आरोपी पटना से कार लेकर मुंगेर पहुंचे, दोपहर करीब डेढ़ बजे मासूम अभिराज का अपहरण किया और उसे कार में बैठाकर वापस पंजाब के लिए रवाना हो गए।
मुख्य सूत्रधार संगीता देवी फरार
अभिराज अपहरण मामले में भोजपुर के आरा से गिरफ्तार पंजाब और बेगूसराय के पांचों आरोपियों को गुरुवार को पुलिस मुंगेर ले आई, जहां कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी छह आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। हालांकि, इस पूरे रैकेट की मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड कासिम बाजार के नौलखा निवासी संगीता देवी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
बच्चा तस्करी के बड़े रैकेट की आशंका
आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि नीलम देवी ने संगीता देवी को बच्चा लाने के लिए ढाई लाख रुपये दिए थे, जिसमें से संगीता ने नीरज को एक लाख रुपये दिए और बाकी पैसे खुद रख लिए। फिलहाल फरार संगीता देवी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। पुलिस को अंदेशा है कि संगीता की गिरफ्तारी के बाद बच्चा चोरी और तस्करी के कई अन्य अंतरराज्यीय गिरोहों का खुलासा हो सकता है।
आरोपी नीरज की गायब पत्नी और बच्चे को लेकर भी शुरू हुई जांच
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और बेहद संदेहास्पद और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। स्थानीय निवासियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी नीरज की पत्नी और उसका एक छोटा बच्चा पिछले वर्ष नवंबर 2025 में अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में घर से गायब हो गए थे।
इस वारदात के सामने आने के बाद अब स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पुलिस भी अब इस बिंदु पर गंभीर अनुसंधान कर रही है कि कहीं नीरज की गायब पत्नी और बच्चे के तार भी किसी बड़े बच्चा चोर या मानव तस्करी गिरोह से तो नहीं जुड़े हैं। पुलिस इस आशंका की भी जांच कर रही है कि कहीं नीरज ने पैसों के लालच में अपनी ही पत्नी और बच्चे को किसी तस्कर के हाथों तो नहीं सौंप दिया था। हालांकि, एसपी ने स्पष्ट किया कि इन आशंकाओं की अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
जांबाज पुलिस टीम होगी पुरस्कृत
मुंगेर एसपी सैयद इमरान मसूद ने इस सनसनीखेज कांड का महज साढ़े चार घंटे में पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि बच्चे की त्वरित और सुरक्षित बरामदगी में भोजपुर पुलिस और वहां के एसपी का सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा। मुंगेर की कोतवाली पुलिस, थानाध्यक्ष राजीव कुमार तिवारी और आसूचना इकाई की टीम ने जिस पेशेवर दक्षता का परिचय दिया है, उसके लिए पूरी टीम को विशेष रूप से सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा।
अन्य गुमशुदा बच्चों के केस से जोड़े जा रहे तार
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक मासूम के अपहरण तक सीमित नहीं हो सकता। हाल के महीनों में मुंगेर और आसपास के जिलों से गायब हुए अन्य छोटे बच्चों की गुमशुदगी की फाइलों को भी इस गिरोह के तरीकों से जोड़कर देखा जा रहा है। पुलिस प्रशासन अब बड़े पैमाने पर सक्रिय बच्चा तस्करी नेटवर्क का सफाया करने के लिए बहुआयामी जांच में जुट गया है।
