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सांप के डसने पर नेत्रहीन ने दिखाई हिम्मत; झाड़-फूंक छोड़ डिब्बे में बंद किया नाग, लेकर पहुंचा मुंगेर स्वास्थ्य केंद्र

Published: Thu, 13 Aug 2026 01:17 AM (IST)

मुंगेर के धरहरा में एक नेत्रहीन व्यक्ति को सांप ने डस लिया, लेकिन उसने अंधविश्वास छोड़ सांप को डिब्बे में ...और पढ़ें

धरहरा के औड़ाबगीचा गांव में बर्तन रखते समय अनजाने में सांप पर पड़ा पैर; हाथ से पकड़ने पर सांप ने डसा

धरहरा के औड़ाबगीचा गांव में बर्तन रखते समय अनजाने में सांप पर पड़ा पैर; हाथ से पकड़ने पर सांप ने डसा

HighLights

  1. नेत्रहीन व्यक्ति को सांप ने डसा, दिखाई अदम्य हिम्मत।

  2. झाड़-फूंक छोड़ सांप को डिब्बे में बंद कर अस्पताल पहुंचा।

  3. समय पर इलाज से मरीज की हालत अब पूरी तरह सामान्य।

संवाद सहयोगी, धरहरा (मुंगेर)। जब जीवन पर संकट आ पड़े, तो आंखों की रोशनी से कहीं अधिक मन का साहस और जागरूकता काम आती है। ऐसा ही एक अद्भुत और मिसाली मामला मुंगेर जिले के धरहरा थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहां औड़ाबगीचा गांव के रहने वाले एक दृष्टिबाधित (नेत्रहीन) व्यक्ति ने जहरीले सांप के डसने के बाद घबराने या अंधविश्वास में फंसने के बजाय अदम्य साहस और समझदारी का परिचय दिया।

सांप के काटने के तुरंत बाद उन्होंने सांप को एक प्लास्टिक के डिब्बे में सुरक्षित बंद करवाया और इलाज के लिए सीधे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) धरहरा पहुंच गए। उनकी इस सूझबूझ की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है।

बर्तन रखते समय अनजाने में पड़ा पैर, हाथ से छूकर पहचाना तो डसा

प्राप्त विवरण के अनुसार, औड़ाबगीचा गांव निवासी 50 वर्षीय सुरेंद्र उर्फ टनटन पासवान बुधवार को अपने घर के भीतर बर्तन व्यवस्थित कर रख रहे थे। इसी दौरान फर्श पर पहले से मौजूद एक जहरीले सांप पर अचानक उनका पैर पड़ गया।

पैर में कुछ ठंडा और अजीब महसूस होने पर दृष्टिबाधित होने के कारण सुरेंद्र ने नीचे झुककर हाथ से उसे छूकर पहचानने का प्रयास किया। जैसे ही उन्होंने हाथ आगे बढ़ाया, बिलबिलाए सांप ने उनके हाथ में डंक मार दिया। सांप के काटते ही सुरेंद्र समझ गए कि उन्हें विषैले जीव ने डस लिया है। उन्होंने बिना पल गंवाए अपनी पत्नी को आवाज दी और पूरी घटना की जानकारी दी।

अंधविश्वास को ठुकराया; झाड़-फूंक की जगह अस्पताल जाने की चुनी राह

घटना के तुरंत बाद आसपास के कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक ढर्रे पर चलते हुए ओझा-गुणी से झाड़-फूंक कराने की सलाह दी। लेकिन शिक्षित न होते हुए भी विचारों से जागरूक सुरेंद्र ने इस अंधविश्वास को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने समय बर्बाद किए बिना डॉक्टरी इलाज कराने को प्राथमिकता दी।

सुरेंद्र ने परिजनों की मदद से उस सांप को सुरक्षित रूप से एक प्लास्टिक के डिब्बे में बंद करवाया ताकि डॉक्टर यह पहचान सकें कि सांप कितना विषैला था और उसी अनुसार एंटी-वेनम (Anti-Venom) दिया जा सके। इसके बाद वे खुद उस डिब्बे को साथ लेकर इलाज के लिए धरहरा सीएचसी पहुंचे।

अस्पताल में इलाज जारी, डॉक्टर बोले- मरीज की हालत पूरी तरह सामान्य

अस्पताल परिसर में जब एक नेत्रहीन व्यक्ति को हाथ में सांप बंद डिब्बा लिए देखा गया, तो वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों और अन्य मरीजों के बीच उत्सुकता और कौतूहल का माहौल बन गया।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने बिना किसी विलंब के उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया। चिकित्सक ने बताया कि सही समय पर अस्पताल पहुंचने और उचित प्राथमिक चिकित्सा मिलने के कारण मरीज की स्थिति पूरी तरह से खतरे से बाहर और सामान्य है। फिलहाल उन्हें डॉक्टरों की देखरेख में ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। अंधविश्वास के दौर में सुरेंद्र की यह समझदारी समाज के लिए एक बड़ा संदेश है।