कागज पर 40 बच्चे, केंद्रों पर ताला और सन्नाटा! मुंगेर में आंगनबाड़ी की पड़ताल ने जिम्मेदारों के दावों की खोली पोल
मुंगेर में आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल में सरकारी दावों की पोल खुल गई है, जहां 97 में से 40 से ...और पढ़ें

11.39 बजे बंद बिशनपुर 10 नंबर वार्ड दक्षिण टोला स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 62. जागरण
HighLights
40 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
कई केंद्र बंद मिले, बच्चों की उपस्थिति बेहद कम दर्ज हुई।
एक सेविका पर दो-तीन केंद्रों का प्रभार, धांधली की आशंका।
मनोज कुमार, असरगंज (मुंगेर)। Munger Anganwadi Reality Check: असरगंज प्रखंड एवं नगर पंचायत क्षेत्र में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल उलट है। दैनिक जागरण की विशेष पड़ताल में क्षेत्र के कुल 97 केंद्रों में से 40 से अधिक केंद्रों का संचालन मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।
कहीं केंद्र पर ताला लटका मिला, तो कहीं नामांकित बच्चों की तुलना में उपस्थिति बेहद कम रही। हैरान करने वाली बात यह भी सामने आई कि एक-एक सेविका के कंधे पर दो से तीन केंद्रों का प्रभार लाद दिया गया है। ऐसे में पोषाहार वितरण, बच्चों की उपस्थिति पंजी और विभागीय निरीक्षण के रिकॉर्ड्स में बड़े पैमाने पर धांधली की आशंका गहरा गई है।
निरीक्षण के दौरान सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे के निर्धारित समय में आठ प्रमुख केंद्रों का जायजा लिया गया। इन केंद्रों पर कुल 320 बच्चे नामांकित थे, लेकिन मौके पर सिर्फ 90 बच्चे ही उपस्थित पाए गए। यानी औसतन प्रत्येक केंद्र पर 40 में से केवल 11 बच्चे (28.1 प्रतिशत) ही मौजूद थे।
कहीं 40 में मिला सिर्फ 1 बच्चा, तो कहीं दोपहर में ही लटक गया ताला
पड़ताल के दौरान मदारपुर गांव के वार्ड-13 स्थित केंद्र संख्या 31/16 में 40 नामांकित बच्चों के विरुद्ध महज 01 बच्चा उपस्थित मिला। वहीं, मकवा वार्ड-4 का केंद्र संख्या 37 दोपहर 12:10 बजे ही बंद पाया गया। विक्रमपुर सूढ़ी टोला (केंद्र 85) में 16 और मुस्लिम टोला (केंद्र 45) में 10 बच्चे ही मिले, जिनमें से कई बच्चे बिना यूनिफॉर्म के थे।
इसी तरह रहमतपुर (केंद्र 47) में 12, धुरिया (केंद्र 42) में 16 और पासवान टोली (केंद्र 36) में 15 बच्चे उपस्थित मिले। केंद्र संख्या 85, 36 और 90 का प्रभार अकेले सेविका मिक्की कुमारी व सहायिका निशा कुमारी के पास है, जिससे केंद्रों के पारदर्शी संचालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
| केंद्र संख्या | स्थान / वार्ड | नामांकित | उपस्थित | स्थिति |
| 31/16 | मदारपुर, वार्ड-13 | 40 | 01 | अति दयनीय |
| 90 | मकवा, वार्ड-03 | 40 | 20 | सामान्य |
| 37 | मकवा, वार्ड-04 | 40 | -- | बंद पाया गया |
| 36 | पासवान टोली | 40 | 15 | कम उपस्थिति |
| 42 | धुरिया, वार्ड-14 | 40 | 16 | कम उपस्थिति |
| 85 | विक्रमपुर सूढ़ी टोला | 40 | 16 | बिना ड्रेस बच्चे |
| 45 | मुस्लिम टोला | 40 | 10 | बिना ड्रेस बच्चे |
| 47 | रहमतपुर | 40 | 12 | कम उपस्थिति |
अधिकारियों का रुख: मानदेय कटौती, स्पष्टीकरण और व्यावहारिक जांच के आदेश
मामला उजागर होने के बाद विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। महिला पर्यवेक्षिका आभा कुमारी सिंह ने बताया कि कमियों वाले केंद्रों की सेविकाओं से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है और रिपोर्ट विभागीय कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।
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वहीं, सीडीपीओ अमन कुमार ने कहा कि केंद्र बंद मिलने पर संबंधित सेविका के एक माह का मानदेय काटने और बच्चों की उपस्थिति कम होने पर एक दिन का वेतन रोकने का कड़ा नियम है।
उन्होंने आश्वस्त किया कि एक ही सेविका के जिम्मे तीन केंद्र होने की व्यावहारिक स्थिति और उपस्थिति पंजी के साथ पोषाहार वितरण के रिकॉर्ड का गहनता से भौतिक सत्यापन कराया जाएगा।
मैं तीन प्रखंडों के प्रभार में हूं। मूल पदस्थापन टेटिया बंबर में है और असरगंज का अतिरिक्त प्रभार है। कार्य सुविधा के अनुसार असरगंज जाकर काम का निपटारा करते हैं। किस दिन किस प्रखंड में रहना है, इसके लिए दिन निर्धारित नहीं है। निरीक्षण के दौरान केंद्र बंद मिलने पर संबंधित सेविका के एक माह के मानदेय की कटौती की जाती है। वहीं, जिस केंद्र पर बच्चों की संख्या कम पाई जाती है, वहां एक दिन का मानदेय रोकने का प्रावधान है। एक सेविका को दो या तीन केंद्रों का प्रभार दिए जाने की स्थिति में सभी केंद्रों का संचालन व्यवहारिक रूप से कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है, इसकी भी जांच की जाएगी।
