'8वीं के बाद छूट गई थी पढ़ाई, मां के सहयोग से दे रही 10वीं की परीक्षा'; मुंगेर में 1200 बेटियों को मिला 'दूसरा मौका'
मुंगेर में 'एजुकेट गर्ल्स' और आईटीसी के 'मिशन सुनहरा कल' के 'प्रगति सेकंड चांस' कार्यक्रम ने 1200 से अधिक ड्रॉपआउट ...और पढ़ें
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एजुकेट गर्ल्स और आईटीसी के 'मिशन सुनहरा कल' के तहत 14 से 29 वर्ष की ड्रापआउट युवतियों को मुख्यधारा से जोड़ा गया
HighLights
एजुकेट गर्ल्स ने मुंगेर में 'प्रगति सेकंड चांस' कार्यक्रम चलाया।
1200 से अधिक ड्रॉपआउट लड़कियों को शिक्षा से जोड़ा गया।
850 से ज्यादा छात्राएं अब 10वीं की परीक्षा दे रही हैं।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक मजबूरियों के कारण बीच में पढ़ाई छोड़ चुकी बेटियों के लिए शिक्षा की राह एक बार फिर से आसान हो गई है। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित गैर-लाभकारी संस्था 'एजुकेट गर्ल्स' (Educate Girls) द्वारा आईटीसी के 'मिशन सुनहरा कल' के सहयोग से संचालित 'प्रगति सेकंड चांस' कार्यक्रम के जरिए मुंगेर जिले में 1200 से अधिक ड्रापआउट किशोरियों और युवतियों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।
वर्तमान में इनमें से 850 से अधिक शिक्षार्थी बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (बीबोस) की 10वीं (मैट्रिक) की परीक्षा दे रही हैं। इस विशेष अभियान के तहत 14 से 29 वर्ष की उन युवतियों की पहचान की गई थी, जिनकी पढ़ाई किसी मजबूरीवश रुक गई थी।
घर-घर काउंसलिंग और विशेष शिविरों के माध्यम से पढ़ाई का मिला दूसरा मौका
अभियान के अंतर्गत संस्था की टीम ने गांव-गांव पहुंचकर परिवारों से सीधा संवाद साधा, काउंसलिंग की और बेटियों को आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्रगति शिविरों और सामुदायिक मेंटर्स के माध्यम से छात्राओं को उनकी सहूलियत के अनुसार लचीली शिक्षण व्यवस्था और मुफ्त अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई।
एजुकेट गर्ल्स का यह सराहनीय कार्यक्रम बिहार के 25 से अधिक जिलों में चल रहा है, जिसमें अकेले मुंगेर जिले से 1200 से अधिक नामांकन इसकी व्यापक सफलता को बयां करते हैं। परीक्षा के दौरान संस्था की फील्ड टीम ने छात्राओं को परीक्षा केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने में भी मार्गदर्शन किया।
'मां के सहयोग और प्रगति शिविर से संवर रहा भविष्य', अधिकारियों ने जताया भरोसा
प्रगति योजना की लाभार्थी छात्रा लुसि परवीन ने बताया कि आठवीं कक्षा के बाद उनकी पढ़ाई बंद हो गई थी। लेकिन मां के सहयोग और प्रगति शिविर के मार्गदर्शन से उन्हें दोबारा पढ़ने का मौका मिला। अब वे 10वीं की परीक्षा देकर अपने बेहतर भविष्य के सपने को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
एजुकेट गर्ल्स के बिहार स्टेट लीड गोपाल सिंह ने बताया कि टीम ने काउंसलिंग, लर्निंग सेशन और छात्राओं को परीक्षा हॉल तक पहुंचाने में दिन-रात मेहनत की है। वहीं, जिला ऑपरेशन लीड प्रकाश सिंह ने कहा कि परीक्षा केंद्र तक पहुंची हर एक शिक्षार्थी के पीछे एक बेटी के साहस, जिद और उसके परिवार के भरोसे की नई कहानी छिपी है।
