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मुंगेर में गंगा की बाढ़ का कहर जारी, लोग छतों और तंबुओं में काट रहे जिंदगी

Published: Tue, 08 Sep 2026 04:25 PM (IST)

मुंगेर के जमालपुर में गंगा नदी की बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त है, जहाँ लोग छतों और सड़क किनारे तंबुओं में रहने को मजबूर हैं।

मुंगेर में बाढ़ का भीषण रूप

मुंगेर में बाढ़ का भीषण रूप

HighLights

  1. जमालपुर में गंगा की बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित।

  2. लोग छतों पर और सड़क किनारे तंबू में रह रहे।

  3. भोजन, पशु चारे का संकट; सामुदायिक रसोई शुरू।

केएम राज, जमालपुर (मुंगेर)। चारों तरफ पानी ही पानी...। जिस घर में कुछ दिन पहले तक बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, आज उसी घर के निचले हिस्से में गंगा का पानी लहरा रहा है। चूल्हा बुझ चुका है। अनाज पानी में डूब गया है। पशुओं के लिए चारा तक नहीं बचा। दरवाजे तक पहुंचने वाला रास्ता अब दिखाई नहीं देता। जिनके घरों में पानी घुस गया, उनमें रहने वाले परिवार अब छतों पर शरण लिए हुए हैं। 

मंगलवार को धूप में तपती छत पर ही किसी तरह महिलाएं भोजन पका रही हैं। नीचे पानी और ऊपर आसमान... यही इन परिवारों की जिंदगी बन गई है। जमालपुर प्रखंड की सिंघिया, परहम और इंद्रूख पंचायत के गांवों में जिंदगी इसी तरह मुश्किलों के बीच आगे बढ़ रही है। निचला इलाका होने के कारण गंगा का पानी पूरी तरह फैल गया है। 

कई घरों में तीन से चार फीट तक पानी है। छह-सात दिनों से यही हालात हैं। घर में रखा अनाज पानी में डूब चुका है। खाना पकाने का सामान खराब हो गया। मवेशियों के लिए रखा चारा भी पानी की भेंट चढ़ गया। छत पर परिवार और छत पर ही चूल्हा। 

धूप से तपती छत पर महिलाएं किसी तरह भोजन तैयार कर रही हैं। नीचे उतरना संभव नहीं है। ग्रामीणों की आंखों में एक ही चिंता है, आज का खाना जुटेगा, लेकिन कल क्या होगा।

सड़क किनारे तंबू बना आशियाना

कई परिवारों ने घर छोड़ दिया है। सड़क किनारे तंबू तानकर रहने को मजबूर हैं। बच्चों के लिए न खेलने की जगह है और न बुजुर्गों के आराम की। सामान के नाम पर कुछ कपड़े, बर्तन और जरूरी चीजें ही साथ हैं। ग्रामीण बताते हैं कि बारिश शुरू हुई तो मुश्किल और बढ़ जाएगी। 

जिन लोगों ने छत को सुरक्षित ठिकाना समझकर शरण ली है, उनके सामने भी सवाल है कि तेज वर्षा में कहां जाएंगे। बाढ़ ने गांवों का प्रखंड और जिला मुख्यालय से संपर्क काट दिया है। जरूरी सामान लाने के लिए भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। आसपास के स्कूलों में पानी फैल जाने से पढ़ाई भी बंद है। 

ग्रामीण अरविंद मंडल, नवीन कुमार, अशोक मंडल, रोशन कुमार, सरवन कुमार और अजय कुमार कहते हैं कि हर वर्ष बाढ़ आती है और यही स्थिति बनती है। छह-सात दिनों से घरों में पानी है, लेकिन पर्याप्त राहत नहीं मिलने से परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।

मवेशियों के लिए चारा भी संकट

बाढ़ का असर सिर्फ इंसानों पर नहीं है। मवेशियों के सामने भी चारे का संकट खड़ा हो गया है। घर में रखा चारा पानी में डूब गया। पशुओं को बचाए रखने के लिए ग्रामीण अब सूखे चारे की तलाश कर रहे हैं। ग्रामीणों ने राहत सामग्री, भोजन, पशु चारा और सुरक्षित आश्रय की तत्काल व्यवस्था की मांग की है। 

उनका कहना है कि बाढ़ में घर डूबने के बाद सबसे बड़ी जरूरत पेट भरने और मवेशियों को बचाने की है। इधर, जमालपुर सीओ प्रीति कुमारी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित पांच पंचायतों में 15 जगहों पर विशेष रूप से कम्युनिटी किचन की व्यवस्था कराई गई है। प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी कराई जाएगी।