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जमालपुर रेल कारखाने में बनेंगे सोलरयुक्त 200 BVCM गार्ड वैगन, 81 करोड़ की लागत; 360 डिग्री कुर्सी व आधुनिक सुविधाएं

Published: Mon, 21 Sep 2026 06:29 PM (IST)

Jamalpur Railway Workshop Solar Guard Wagon: जमालपुर रेल कारखाना 81 करोड़ की लागत से 200 सोलरयुक्त BVCM गार्ड वैगन बनाएगा, ...और पढ़ें

जमालपुर रेल कारखाने में तैयार होंगे 200 सोलरयुक्त गार्ड वैगन! 81 करोड़ का वर्कआर्डर, मिलेंगी 360° घूमने वाली कुर्सियां

जमालपुर रेल कारखाने में तैयार होंगे 200 सोलरयुक्त गार्ड वैगन! 81 करोड़ का वर्कआर्डर, मिलेंगी 360° घूमने वाली कुर्सियां

HighLights

  1. जमालपुर कारखाना बनाएगा 200 सोलरयुक्त BVCM गार्ड वैगन।

  2. 81 करोड़ की लागत से आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे वैगन।

  3. ट्रेन मैनेजरों को मिलेंगी 360 डिग्री कुर्सी, सोलर पावर, बायो-टॉयलेट।

संवाद सहयोगी, जमालपुर (मुंगेर)। Jamalpur Railway Workshop Solar Guard Wagon: एशिया के सबसे पुराने और ऐतिहासिक रेल इंजन कारखाने जमालपुर के खाते में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। अब तक हाइड्रोलिक क्रेन, वैगन टैंकर, सेना के विशेष वैगन, जैक निर्माण और पुराने डिब्बों की भारी मरम्मत तक सीमित रहा यह कारखाना अब पहली बार सोलरयुक्त ट्रेन मैनेजर (गार्ड) वैगन तैयार करने में जुट गया है।

बीएलसी शॉप में आधुनिक तकनीक से आकार ले रहा ‘बीवीसीएम गार्ड वैगन’ (ब्रॉड गेज बोगी वैगन) जमालपुर की उच्च तकनीकी क्षमता और बदलते रेल परिवेश के अनुरूप उत्पादन में आए बड़े बदलाव का स्पष्ट संकेत है।

रेलवे बोर्ड ने कारखाने की कार्यकुशलता पर भरोसा जताते हुए 81 करोड़ रुपये की लागत से कुल 200 बीवीसीएम गार्ड वैगन निर्माण का महत्वपूर्ण लक्ष्य सौंपा है। इस परियोजना के तहत एक वैगन के निर्माण पर लगभग 40.50 लाख रुपये खर्च होंगे।

ब्रॉडगेज बोगी के इन नए वैगनों में पर्यावरण अनुकूल सौर ऊर्जा (सोलर पावर) के साथ अत्याधुनिक सुरक्षा व सुविधा मानकों का समावेश किया जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन वैगनों को भारतीय रेल की विभिन्न मालगाड़ियों में ट्रेन मैनेजरों की ड्यूटी के लिए शामिल किया जाएगा।

लालटेन और तपती गर्मी से मुक्ति, मिलेंगी 360° घूमने वाली कुर्सियां

मालगाड़ियों के पुराने ब्रेक वैगन में ट्रेन मैनेजर की ड्यूटी किसी कठोर अग्निपरीक्षा से कम नहीं होती थी। लोहे और एल्युमिनियम से बने इन डिब्बों में बिजली व रोशनी का कोई प्रबंध न होने के कारण रात के वक्त कर्मियों को लालटेन या टॉर्च की रोशनी के सहारे रजिस्टर मेंटेन करना पड़ता था। गर्मियों में यह डिब्बा तपती भट्टी जैसा बन जाता था, जहां पंखा न होने से 10 से 12 घंटे की लंबी ड्यूटी काटना दूभर हो जाता था। इसके अलावा समुचित शौचालय का भी घोर अभाव था।

अब रेलवे इस पुराने ढांचे को पूरी तरह बदलने जा रहा है। जमालपुर में बन रहे नए वैगनों की छत पर सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, जिससे दिन-रात पंखे और रोशनी की निर्बाध सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही ट्रेन मैनेजर के आराम और सुविधा के लिए 360 डिग्री पर घूमने वाली एर्गोनॉमिक कुर्सी, चार्जिंग प्वाइंट्स और आधुनिक बायो-टॉयलेट जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं।

देश के चुनिंदा वर्कशॉप्स की कतार में शामिल हुआ जमालपुर

गौरतलब है कि आधुनिक सुविधाओं से लैस ऐसे सोलर गार्ड वैगनों का निर्माण अब तक देश में केवल गोल्डन रॉक, तिरुचिरापल्ली और पंजाब के रेल कारखानों में ही हो रहा था। अब इस विशिष्ट सूची में जमालपुर का नाम भी दर्ज हो गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि जमालपुर वर्कशॉप अब पारंपरिक मरम्मत कार्य से आगे बढ़कर ऊर्जा-कुशल और हरित रेल उपकरणों के विनिर्माण का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

कारखाने के मुख्य कारखाना प्रबंधक (सीडब्ल्यूएम) विनय प्रसाद वर्णवाल ने बताया कि वर्कशॉप में वर्कलोड की कोई कमी नहीं है। रेलवे बोर्ड से मिल रहे चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट्स को अधिकारी और कर्मचारी अपनी तकनीकी दक्षता, गुणवत्ता और लगन से समय सीमा में पूरा कर रहे हैं। वर्तमान में बीएलसी शॉप में उप मुख्य यांत्रिक अभियंता (निर्माण) सौरभ कुमार के कुशल नेतृत्व में इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर तेजी से कार्य चल रहा है।

"रेलवे बोर्ड ने कारखाने को 81 करोड़ रुपये की लागत से 200 सोलरयुक्त बीवीसीएम गार्ड वैगन बनाने का लक्ष्य दिया है। कारखाने में पर्याप्त वर्कलोड है और हमारे कुशल कामगार नई तकनीक के साथ इसे समय पर तैयार करने में जुटे हैं। इस परियोजना से जमालपुर की उत्पादन क्षमता और तकनीकी दक्षता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।"

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— विनय प्रसाद वर्णवाल, मुख्य कारखाना प्रबंधक (CWM), जमालपुर रेल कारखाना