जान हथेली पर, मकसद सिर्फ एक सीट! जमालपुर जंक्शन पर ट्रैक पर उतर रहे मुसाफिर; 7 बोगियों वाली ट्रेन में मारामारी
Jamalpur Khagaria Passenger Train: जमालपुर जंक्शन पर यात्री ट्रेन में सीट पाने के लिए जानलेवा जोखिम उठाकर रेलवे ट्रैक पर ...और पढ़ें

Jamalpur Khagaria Passenger Train: जमालपुर जंक्शन पर सीट के लिए जान जोखिम में डाल रहे यात्री; 7 कोच की पैसेंजर में बोगियां बढ़ाने की मांग अनसुनी
HighLights
जमालपुर जंक्शन पर यात्री सीट के लिए ट्रैक पर जान जोखिम में।
खगड़िया से आने वाली 7 कोच की पैसेंजर ट्रेन में भारी भीड़।
कोच बढ़ाने की वर्षों पुरानी मांग पर रेलवे प्रशासन बेपरवाह।
वाद सूत्र, जमालपुर (मुंगेर)। Jamalpur Khagaria Passenger Train: प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित खड़े रहकर ट्रेन का इंतजार करने के बजाय सीधे रेलवे ट्रैक के किनारे जानलेवा जोखिम उठाना—यह किसी आपात स्थिति की नहीं, बल्कि जमालपुर जंक्शन पर रोज की आम तस्वीर बन चुकी है। यहां मुसाफिरों के लिए अपनी जिंदगी की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी ट्रेन में बैठने के लिए एक अदद सीट हासिल करना हो गया है। जमालपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या चार पर हर रोज खगड़िया से आने वाली पैसेंजर ट्रेन के पहुंचते ही सीट हथियाने की ऐसी अंधी होड़ मचती है, जो सीधे तौर पर बड़े रेल हादसे को न्योता देती नजर आती है।
जमालपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या चार पर सीट पाने की अंधी होड़ में रेलवे ट्रैक किनारे खड़े हो रहे यात्री
खगड़िया से जमालपुर आने वाली 7 कोच की पैसेंजर ट्रेन के रुकते ही मचती है अफरातफरी, मंडराता है बड़े हादसे का खतरा
जमालपुर-खगड़िया रेलखंड पर बोगियां (कोच) बढ़ाने की वर्षों पुरानी मांग पर अब तक रेलवे प्रशासन ने नहीं लिया कोई संज्ञान
ट्रेन के दोबारा खगड़िया प्रस्थान करने से पहले प्लेटफॉर्म छोड़ पटरियों के बीच जान जोखिम में डालकर चढ़ते हैं दैनिक यात्री
दरअसल, खगड़िया से चलकर जमालपुर पहुंचने वाली यह पैसेंजर ट्रेन महज सात बोगियों (कोच) के साथ चलाई जा रही है। दैनिक यात्रियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और दूध-सब्जी विक्रेताओं के भारी दबाव के सामने सात कोच की यह ट्रेन ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। जैसे ही यह गाड़ी प्लेटफॉर्म संख्या चार पर आकर रुकती है, खगड़िया लौटने वाले मुसाफिर प्लेटफॉर्म पर अपनी बारी का इंतजार करने के बजाय तुरंत दौड़कर दोनों पटरियों के बीच और ट्रैक के बेहद करीब खड़े हो जाते हैं।
पटरियों से ही बोगी में घुसने की होड़, RPF-GRP भी बेपरवाह
ट्रेन के रुकने और दोबारा खगड़िया के लिए प्रस्थान करने के बीच के समय में मुसाफिर ट्रैक किनारे खड़े होकर खिड़कियों से रुमाल, बैग और गमछा डालकर सीट सुरक्षित करने की जानलेवा जुगत में लग जाते हैं। कई बार बगल के ट्रैक से अन्य मालगाड़ियों या एक्सप्रेस ट्रेनों के गुजरने के दौरान भी लोग पटरियों से हटने का नाम नहीं लेते। सुरक्षा के दावों के बीच आरपीएफ और जीआरपी की मौजूदगी के बावजूद प्लेटफॉर्म के निचले हिस्से और पटरियों पर यात्रियों की यह अनियंत्रित भीड़ खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाती है।
कोच बढ़ाने की मांग लंबे समय से ठंडे बस्ते में
इस पूरे जानलेवा संकट की मुख्य वजह ट्रेन में बोगियों की भारी कमी है। जमालपुर-खगड़िया रूट पर यात्रियों की लगातार बढ़ती तादाद को देखते हुए इस पैसेंजर ट्रेन में कोचों की संख्या कम से कम 12 से 16 करने की मांग स्थानीय दैनिक यात्री संघ और आम लोग वर्षों से कर रहे हैं। इस संबंध में कई बार पूर्व रेलवे और संबंधित रेल मंडल के उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्तर पर नतीजा सिफर ही रहा है। यदि समय रहते बोगियों की संख्या बढ़ाकर व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो प्लेटफॉर्म संख्या चार पर सीट की यह होड़ कभी भी किसी बड़ी मानवीय त्रासदी में तब्दील हो सकती है।
