हैदर अली, मुंगेर : आधी आबादी की सोच भी पूरी तरह बदल गई है। मतदान के प्रति शनिवार को काफी उत्साहित दिखीं। बिहार विधान सभा के तारापुर में शनिवार को महिलाओं ने पहले मतदान किया इसके बाद अपने खेती-किसानी में जुट गए। महिला किसानों ने ईबीएम का खूब वटन दबाया। टेटिया बंबर के बरसडो गांव में दंपती विक्रम सिंह और मीना देवी ने कहा पहले मतदान फिर श्रमदान। उन्होंने कहा एक वोट भी लोकतंत्र के महापर्व में मायने रखता है। वे लोग रात में ही विचार कर लिए थे, कि खेत का काम मतदान के बाद निपटाएंगे। किसानों ने कहा कि खेत छोड़ा तो घर की स्थिति बिगड़ जाएगी। खेत से ही जीविका चलता है। वे खेत में सब्जी लगा रही थे। किसान सुबह में पशुओं का चारा लाए और बाद में स्नान करने के बाद मतदान किया। इन्होंने बताया कि सभी दलों के प्रत्याशी और उनके समर्थक भी किसानों को मोबाइल पर फोन कर मतदान करने के लिए प्रेरित करते रहे। इतना ही नहीं कुछ समर्थक तो वोटों को लेने के लिए खेतों तक पहुंच गए। मतदान केंद्रों पर मतदान कर्मियों की ओर से प्रत्येक मतदाता की थर्मल स्क्रीनिग करने के बाद ग्लव्स दिया जा रहा है। मतदान के बाद बगल में रखे डस्टबिन में ग्लब्स को डालकर मतदाता बाहर निकल जा रहे थे। मतदान के प्रारंभिक चरण में ही मतदान केंद्रों पर महिलाओं की भीड़ इस बात को प्रमाणित कर रही थी कि लोकतंत्र के महापर्व में वह भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहीं हैं। वह पुरुषों से पीछे रहने वाली नहीं है। महिलाओं की लंबी कतार देखकर पुरुष मतदाताओं को अपनी बारी का इंतजार करने में समय लगा।

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