बिहार में स्वास्थ्य विभाग का अजीबोगरीब कारनामा, फरार फर्जी नर्सों का कर दिया ट्रांसफर
राज्य स्वास्थ्य निदेशालय ने फर्जी दस्तावेज के आरोप में फरार स्टाफ नर्सों का स्थानांतरण कर दिया है। इन नर्सों पर ...और पढ़ें

बिहार में स्वास्थ्य विभाग का अजीबोगरीब कारनामा, फरार फर्जी नर्सों का कर दिया ट्रांसफर

समय कम है?
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संवाद सूत्र, धरहरा (मुंगेर)। राज्य स्वास्थ्य निदेशालय के हालिया स्थानांतरण आदेश ने विभागीय कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 26 मार्च को जारी स्टाफ नर्सों के तबादले की सूची में ऐसे नाम शामिल हैं, जिन पर फर्जी दस्तावेज के आधार पर नियुक्ति का आरोप है और जिनके खिलाफ पहले से केस दर्ज है।
हैरानी की बात यह है कि ये सभी आरोपित जनवरी 2025 से ही कार्यस्थल से फरार बताए जा रहे हैं, बावजूद इसके इन्हें वर्तमान में कार्यरत मानते हुए दूसरे जिलों में पोस्टिंग दे दी गई है। द
रअसल, 24 जनवरी 2025 को केस दर्ज होने के बाद से संबंधित नर्सें अपने-अपने कार्यस्थल से बिना सूचना के गायब हैं।
विभाग ने न केवल इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी, बल्कि वेतन मद में दी गई राशि की रिकवरी का भी आदेश दिया था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब विभाग खुद इन्हें फरार और आरोपित मान चुका है, तो फिर स्थानांतरण सूची में इनका नाम किस आधार पर शामिल किया गया।
20 नर्सों पर दर्ज हुआ था केस
22 जनवरी 2025 को तत्कालीन सिविल सर्जन ने राज्य मुख्यालय के निर्देश पर जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत 20 ए-ग्रेड स्टाफ नर्सों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज के आधार पर नियुक्ति के आरोप में केस दर्ज कराने का आदेश दिया था।
इसके आलोक में धरहरा पीएचसी प्रभारी ने 24 जनवरी को सात नर्सों के खिलाफ थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। केस की भनक लगते ही सभी आरोपित कार्यस्थल छोड़कर फरार हो गए और तब से वापस नहीं लौटे।
स्थानांतरण सूची में शामिल नाम
स्वास्थ्य निदेशालय द्वारा जारी सूची में सरिता कुमारी (सीरियल 874), सरवेज आलम (875) और संगीता कुमारी (1001) का नाम प्रमुख रूप से शामिल है।
विभाग ने इन्हें धरहरा सीएचसी में पदस्थापित दिखाते हुए पीएमसीएच पटना, सदर अस्पताल हाजीपुर (वैशाली) और अनुमंडलीय अस्पताल शेरघाटी (गया) में स्थानांतरित कर दिया है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब संबंधित कर्मी महीनों से कार्यस्थल पर मौजूद ही नहीं हैं, तो प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी उन्हें किस आधार पर विरमित करेंगे।
मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इन कर्मचारियों का स्थानांतरण कैसे हुआ, यह विभागीय अधिकारी ही बता सकते हैं। जबकि इन्हें फर्जी दस्तावेज से नौकरी लेने में बर्खास्त किया गया था। - डॉ. अविनाश कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, धरहरा
