मधुबनी, संस : इंटरमीडिएट की परीक्षा के उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन हेतु नियुक्त 135 परीक्षकों द्वारा अपने निर्धारित मूल्यांकन केन्द्रों पर योगदान नहीं देने पर जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा उनके विरुद्ध प्राथमिकी का सर्वत्र विरोध हो रहा है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति और प्रशासन के प्रति शिक्षकों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। शिक्षक इसे तुगलकी फरमान मान रहे है और प्राथमिकी को अपमानजनक मान रहे हैं। गौरतलब है कि ऐसे शिक्षकों के विरूद्ध भी प्राथमिकी दर्ज कर दी गई है जो बीमारी से जूझ रहे है और जिन्होंने परीक्षक के रूप में योगदान करने में अपनी असमर्थता व्यक्त की है। बीएसजे कालेज राजनगर के प्रधानाचार्य समेत कई शिक्षकों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करा दी गई जो अपने महाविद्यालय में डिग्री पार्ट थ्री की परीक्षा में संलग्न है। विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार परीक्षा संचालन भी अनिवार्य है और इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। बावजूद परीक्षा संचालन में व्यस्त शिक्षकों पर प्राथमिकी का विरोध हो रहा है। कई शिक्षक प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी मूल्यांकन केन्द्रों पर पहुंच रहे है जबकि अधिकांश विषयों का मूल्यांकन या तो समाप्त हो चुका है या समाप्ति की ओर है। शिक्षकों का कहना है कि बिहार बोर्ड द्वारा इंटर की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की राशि नहीं बढा़ई गई है लेकिन काम का बोझ बढ़ा दिया गया है।

Posted By: Jagran