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मधुबनी के किसान की बेटी बिहार पुलिस में बनेंगी दारोगा, लॉन बॉल्स में अपने नाम किया था गोल्ड

Published: Wed, 02 Sep 2026 06:06 PM (IST)

Bihar Police Sub Inspector Khushboo: मधुबनी की खुशबू कुमारी ने 38वें राष्ट्रीय खेल में लॉन बॉल्स में स्वर्ण पदक जीतकर ...और पढ़ें

खेत-खलिहान में हाथ बंटाने वाली इस बेटी ने लॉन बॉल्स जैसे खेल में ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। (AI Generated Image)

खेत-खलिहान में हाथ बंटाने वाली इस बेटी ने लॉन बॉल्स जैसे खेल में ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। (AI Generated Image)

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प्रदीप मंडल, मधुबनी। Khushboo Kumari Lawn Bowls: पंडौल प्रखंड की भवानीपुर पंचायत के लक्ष्मीपुर गांव की बेटी खुशबू कुमारी ने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि सबसे बड़ी ताकत बना लिया है।

कभी कच्चे घर में रहकर पढ़ाई करने और खेत-खलिहान में हाथ बंटाने वाली इस बेटी ने लॉन बॉल्स जैसे खेल में ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। अब खुशबू बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद पर नई पारी की शुरुआत करने जा रही हैं।

25 साल बाद गोल्ड

उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेल में खुशबू ने अपनी टीम के साथ ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। उन्होंने सहयोगी खिलाड़ी पायल, प्रीति और निखत के साथ विमेन ट्रिपल्स स्पर्धा के फाइनल में पश्चिम बंगाल को 16-14 से शिकस्त दी।

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इस शानदार जीत की बदौलत बिहार की झोली में करीब 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद लॉन बॉल्स का स्वर्ण पदक आया है।

अभावों में तराशा हुनर

खुशबू एक बेहद साधारण और संघर्षशील परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता रामजतन यादव खेती के साथ लुधियाना में एक निजी संस्थान में कार्यरत हैं, जबकि मां ललिता देवी स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में आशा कार्यकर्ता हैं।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से प्राथमिक शिक्षा पाने वाली खुशबू ने जेएमडीपीएल महिला कॉलेज से विज्ञान में स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की है।

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मेडल जीतने का सफर

करीब दस साल पहले खुशबू ने लॉन बॉल्स को अपनी साधना बनाया और निरंतर अभ्यास में जुटी रहीं। उन्होंने वर्ष 2020 के खेलो इंडिया यूथ गेम्स में विमेन पेयर्स स्पर्धा का गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।

इसके बाद वर्ष 2023-24 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप की विमेन फोर्स स्पर्धा में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर अपनी चमक बिखेरी थी।

संसाधनों का अभाव

इस खेल का सफर खुशबू के लिए कभी भी आसान नहीं रहा क्योंकि बिहार में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। लॉन बॉल्स की नई गेंदों का एक सेट 50 से 60 हजार रुपये में आता है, जिसे खरीद पाना उनके लिए संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने दूसरे राज्यों से 15 से 20 हजार रुपये में पुरानी गेंदें मंगवाकर अभ्यास जारी रखा।

गुलजारबाग में बिछाया मैट

राज्य में खेल के लिए उचित ग्राउंड न होने पर प्रतियोगिता से चंद रोज पहले पटना के गुलजारबाग स्टेडियम में मैट बिछाकर तैयारी करनी पड़ती है।

कई बार अभ्यास के लिए राज्य से बाहर का रुख भी करना पड़ता है। हालांकि तमाम दुश्वारियों और आर्थिक तंगी के बावजूद खुशबू ने कभी भी अपने हौसले को टूटने नहीं दिया।

मेडल लाओ नौकरी पाओ

राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक की चमक ने खुशबू की पूरी जिंदगी को एक नई दिशा दे दी है। राज्य सरकार की 'मेडल लाओ, नौकरी पाओ' योजना के तहत उनका चयन बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद पर हुआ है।

पांच सितंबर को राजधानी पटना में आयोजित समारोह में उन्हें आधिकारिक नियुक्ति पत्र सौंपा जाएगा।

पक्का बनेगा कच्चा मकान

बेटी के दारोगा बनने की सूचना मिलते ही पूरे गांव और परिवार में उत्सव का माहौल बना हुआ है। खेल से मिली पुरस्कार राशि और परिजनों के सहयोग से खुशबू अब अपने पुराने कच्चे मकान को पक्का करवाने की योजना बना रही हैं।

उनकी मां ललिता देवी का कहना है कि बेटी के इस संघर्ष ने छोटे भाई-बहनों को भी खेल की तरफ प्रेरित किया है।

रणनीति का अनोखा खेल

गौरतलब है कि लॉन बॉल्स एक बेहद तकनीकी और रणनीतिक टारगेट खेल है, जिसे प्राकृतिक घास या सिंथेटिक ग्रीन पर खेला जाता है। इसमें खिलाड़ी अपनी बायस्ड (घुमावदार) गेंदों को मुख्य लक्ष्य यानी 'जैक' के अधिक से अधिक करीब पहुंचाने का प्रयास करते हैं। भारत में इस खेल को 34वें राष्ट्रीय खेल 2011 में पहली बार पदक स्पर्धा के रूप में शामिल किया गया था।

गांव की नई प्रेरणा

खुशबू का अगला लक्ष्य भविष्य में देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतना और अपनी उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाना है। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक मेडल की कहानी नहीं है, बल्कि उस अदम्य साहस की मिसाल है जिसने सीमित साधनों के बीच बड़े सपने देखना सिखाया है।

खुशबू ने साबित कर दिया है कि पक्के इरादे हों तो सुदूर गांव के खेतों से निकलकर भी राष्ट्रीय फलक पर तिरंगा लहराया जा सकता है।