110 दिन में तैयार होगी सुगंधित धान की किस्म ‘राजेंद्र सरस्वती’, मिथिलांचल के किसानों को तगड़ी कमाई
Paddy Crop Varieties Bihar: डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय ने 'राजेंद्र सरस्वती' नामक सुगंधित धान की किस्म विकसित की है, ...और पढ़ें

HighLights
'राजेंद्र सरस्वती' धान 110 दिनों में पककर तैयार होती है।
उत्तर बिहार के किसानों को दोहरी बंपर उपज का मौका।
मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और हरी खाद के उपयोग पर जोर।
जागरण संवाददाता, मधुबनी। Rajendra Saraswati Rice:आमतौर पर बिहार में बोई जाने वाली सामान्य और मध्यम अवधि वाली धान की किस्में रोपाई से लेकर पकने तक 110 से 135 दिनों (3 से 4 महीने) का समय लेती हैं, जबकि पारंपरिक किस्में 140 से 150 दिनों में तैयार होती हैं।
इसके विपरीत, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा द्वारा विकसित सुगंधित प्रजाति ‘राजेन्द्र सरस्वती’ महज 110 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। कम समय में फसल कट जाने के कारण मधुबनी समेत उत्तर बिहार के किसानों के पास अगली फसल (रबी) की समय पर बुवाई कर एक ही खेत से दोहरी बंपर उपज लेने का पूरा मौका रहेगा।
अनुसंधान प्रक्षेत्र में फसल का निरीक्षण
इसी सिलसिले में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के निदेशक (बीज) डॉ. डी.के. रॉय ने अपनी टीम के साथ क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, झंझारपुर स्थित धान अनुसंधान प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने फसल की वृद्धि, विकास और वर्तमान स्थिति का जायजा लेते हुए वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। निरीक्षण के क्रम में डॉ. रॉय ने जुलाई के अंतिम सप्ताह में रोपित 'राजेन्द्र सरस्वती' धान की फसल का अवलोकन किया और स्थिति संतोषजनक मिलने पर खुशी जताई।
मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर जोर
डॉ. रॉय ने टिकाऊ कृषि के लिए मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को आवश्यक बताते हुए ढैंचा जैसी हरी खाद वाली फसलों के उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि हरी खाद के प्रयोग से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार होता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है।
निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. संजय कुमार, फार्म प्रभारी डॉ. एस.के. मंडल, तकनीकी अधिकारी धीरेंद्र कुमार और आशीष राय सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
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