मधुबनी। खुटौना प्रखंड के मध्य में प्रवाहित भुतही नदी का खौफ इसके दोनों तरफ तटबंध हो जाने के कारण कम जरूर हो गया है किन्तु बरसात में इसके रौद्र रूप को देखकर तटबंधों के किनारे के गांव के लोग अभी भी सहमे-सहमे से रहते हैं। खौफ की वजह अनगिनत रेनकटों से भरे 46 वर्ष पुराने इसके तटबंधों का जर्जर हो जाना है। भारत-नेपाल सीमा के इस पार भारतीय क्षेत्र में पूरब में लक्ष्मीपुर तथा पश्चिम में लौकहा से ये तटबंध शुरू होते हैं। बांए तटबंध में 3 किमी पर बलानपट्टी, 12.4 किमी पर गोठ परसाही, 16 किमी पर टेंगरार तथा 23.7 किमी पर ननपट्टी (फुलपरास) में बरसात में जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो तटबंध टूटने की आशंका बनी रहती है। इसी प्रकार दांए तटबंध में 8-9 किमी के बीच खड़बड़िया, 12-13 किमी के बीच राजपुर व दौलतपुर तथा 17-18 किमी के बीच महथौर में तटबंध पर पानी का प्रबल दवाब खौफ पैदा करता है। दोनों तटबंधों पर बनीं सड़कों (सर्विस रोड) टूटफूट कर बेहद खराब हो गए हैं जो तटबंधों की उपेक्षा की दास्तां बयां कर रहे हैं। जिप सदस्य तजमुल हुसैन का घर दांए तटबंध के किनारे खुशियालपट्टी में है। उनका कहना है कि बाढ़ नियंत्रण महकमा बरसात में जितना सक्रिय रहता है बाकी दिनों में उतना ही लापरवाह रहता है। उनके अनुसार यदि साल के शेष दिनों में तटबंधों की नियमित देखभाल की जाए तो बाढ़ से आतंकित होने की नौबत ही नहीं आएगी। समाजसेवी रामानन्द बनैता के अनुसार भुतही से बेरोकटोक बालू खनन का असर नदी के अलावा तटबंधों पर भी पड़ रहा है। बाढ़ नियंत्रण महकमे में भुतही तटबंधों की निगरानी के लिए तैनात जेई रामप्रवेश तांती तटबंधों पर निर्मित सर्विस रोड की जर्जरता से सहमत दिखते हैं किन्तु भरोसा दिलाते हैं कि चाहे जितनी भी बाढ़ आए तटबंधों को टूटने नहीं दिया जाएगा। उनके अनुसार पूरी निगरानी के साथ क्षतिग्रस्त भागों को दुरूस्त किया जा रहा है।

Posted By: Jagran

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