मधुबनी। महिला विकास निगम एवं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बाल विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन विषय पर स्थानीय डीआरडीए सभागार में मंगलवार को सदर अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न ग्राम पंचायतों के मुखिया का एक दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर डीडीसी अजय कुमार सिंह, सदर एसडीओ सुनील कुमार सिंह, आइसीडीएस की डीपीओ डॉ. रश्मि वर्मा, जिला कल्याण पदाधिकारी राजेश वर्मा, डीआरडीए निदेशक किशोर कुमार आदि ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर महिला विकास निगम के जिला परियोजना प्रबंधक अनुग्रह नारायण तिग्गा, महिला हेल्पलाइन की परामर्शी वीणा चौधरी, जिला पार्षद सईदा बानो समेत सदर अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न ग्राम पंचायतों के मुखिया भी मौजूद थे। डीडीसी अजय कुमार सिंह ने कहा कि बाल विवाह एवं दहेज प्रथा की रोकथाम में ग्राम पंचायतों के मुखिया की प्रभावी भूमिका है। बिहार विवाह पंजीकरण नियमावली 2006 के तहत मुखिया को विवाह पंजीकरण का दायित्व दिया गया है। विवाह पंजीकरण के लिए विवाहों का वैध होना अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में अधिकतम विवाहों को पंजीकृत किए जाने की आवश्यकता है, ताकि बाल विवाह की स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके। इस अभियान के अंतर्गत गठित किये गये पंचायत स्तरीय टास्क फोर्स के अध्यक्ष के रूप में भी मुखिया से विभिन्न अपेक्षाएं है। दहेज एवं बाल विवाह मुक्त बिहार बनाना है। इसके लिए जिले में चार स्तर अर्थात जिलास्तर, अनुमंडल स्तर, प्रखंडस्तर एवं पंचायतस्तर पर टॉस्क फोर्स कमेटी का गठन किया जाना है।

राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत इंटरमीडिएट उत्तीर्ण अविवाहित किशोरियों को दस हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान किया गया है। विवाह का निबंधन नहीं कराने की स्थिति में 30 दिनों के बाद 3 महीना तक 50 रुपये अधिकतम एक हजार रुपये दंड का प्रावधान किया गया है। पूर्व जिला पार्षद सईदा बानो ने बाल विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन को लेकर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।

Posted By: Jagran

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