मधुबनी। बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के महमदपुर गांव में हुए सामूहिक हत्याकांड का एक और नामजद आरोपित पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए गठित एसआइटी टीम ने हत्याकांड के नामजद आरोपित महमदपुर गांव के कौशिक सिंह को समस्तीपुर के बंगाली टोला से गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। प्रभारी थानाध्यक्ष रविद्र प्रसाद, एसआइटी टीम के अनि मृत्युंजय कुमार, अड़ेर के थानाध्यक्ष राजकिशोर कुमार, साहरघाट के थानाध्यक्ष सुरेंद्र पासवान, खिरहर के थानाध्यक्ष अंजेश कुमार ने समस्तीपुर बाजार के बंगाली टोला में छापेमारी कर महमदपुर हत्याकांड के नामजद आरोपित कौशिक सिंह उर्फ संतोष सिंह को गिरफ्तार किया और उसे लेकर बेनीपट्टी थाना पहुंचे। गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ के बाद उसे न्यायिक प्रक्रिया में भेज दिया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। एसआइटी टीम के अनि मृत्युंजय कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित के घर कोर्ट के निर्देश के आलोक में कुर्की-जब्ती की कार्रवाई भी की गई थी, लेकिन आरोपित ने आत्मसमर्पण नहीं किया और वह फरार चल रहा था। गुप्त सुचना के आधार पर समस्तीपुर से आरोपित को गिरफ्तार किया गया है।

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हत्याकांड में अब तक 26 लोगों की हो चुकी गिरफ्तारी :

महमदपुर सामूहिक हत्याकांड में अब तक 23 नामजद व तीन अप्राथमिकी अभियुक्त सहित 26 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सभी फिलहाल जेल में हैं। शेष बचे 10 नामजद आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए एसआइटी टीम लगातार छापेमारी कर रही है। अब तक पुलिस सभी फरार आरोपितों के घर कुर्की-जब्ती की कार्रवाई पूरी कर चुकी है। बता दें कि महमदपुर हत्याकांड में कुल 33 लोगों को नामजद किया गया था।

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होली के दिन हुई थी घटना :

बता दें कि होली के दिन 29 मार्च को महमदपुर गांव में सामूहिक हत्याकांड की घटना को अंजाम दिया गया था। इस हत्याकांड में पांच लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में तीन सगे भाई थे, जबकि एक बीएसएफ का जवान भी इस घटना में मारा गया था जो होली की छुट्टियों में घर आया था। मृतकों में पूर्व सैनिक सुरेंद्र सिंह के तीन पुत्र रणविजय सिंह, अमरेंद्र सिंह व विरेंद्र सिंह के साथ ही उनका भतीजा बीएसएफ जवान राणा प्रताप सिंह एवं रुद्र नारायण दास शामिल थे। इस घटना में जख्मी मनोज सिंह का अभी भी इलाज चल रहा है। घटना के बाद से महमदपुर, गैबीपुर व पौआम गांव में अभी भी पुलिस कैंप कर रही है। इस घटना के बाद महमदपुर में राजनेताओं का जमावड़ा लगने लगा था। उस दौरान नेताओं के बयानबाजी से प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी।