मधुबनी। अखंड सौभाग्य के लिए व्रत हरितालिका तीज भाद्र शुक्ल तृतीया बुधा के चित्रा नक्षत्र को रखा जाता है। व्रती सौभाग्य, निरोग्यता के लिए माता गौरी की पूजा करती हैं। हरियाली तीज, कजरी तीज और करवा चौथ की तरह यह तीज सुहागिनों का व्रत है। व्रती निष्ठा के साथ व्रत रखती है। मान्यता है कि भगवान शंकर को पाने के लिए माता पार्वती ने अन्न और जल त्याग कर किया था। महिलाएं निर्जला रखकर पूजा करती हैं। हरितालिका तीज की तैयारी शुरु हो गई हैं। महिलाएं हरितालिका तीज को लेकर खरीदारी शुरु कर दी हैं। --------------------- तीजव्रत और चौठचन्द्र पूजन है 12 को गणेश पूजा की होगी 13 से शुरुआत : डॉ.रामसेवक भाद्रपद शुक्ल तृतीया को विवाहिताएं अखण्ड सौभाग्य लिए हरितालिका व्रत रखती है । जिसे तीज कहते हैं ।

¨हदू धार्मशास्त्र के जानकार डॉ. रामसेवक झा बताते हैं कि इस वर्ष 12 सितम्बर बुधवार को तीज व्रत एवं उसी दिन चौठचन्द्र पूजन भी है। डॉ. झा ने कहा कि बुधवार को पूरे दिन तृतीया तिथि का योग है। इसलिए बुधवार को ही तीज का व्रत रखना चाहिए। डॉ. झा ने बताया कि भाद्रपद मास के शुक्ल चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जानी जाती है। इसदिन किया गया तीर्थ स्नान, दान, उपवास अनंत फलदायी होता है। परंतु इस चतुर्थी चन्द्र दर्शन का शास्त्र में निषेध है ।

इस वर्ष बुधवार को ही संध्या 06:47बजे से चतुर्थी तिथि की प्रारम्भ हो जाती है। जो अगले दिन गुरुवार को संध्या 05:56बजे ही समाप्त हो जाती है। जबकि गुरुवार को सूर्यास्त 06:09 बजे होता है। अतएव गुरुवार को चन्द्र पूजन के समय चतुर्थी तिथि नही होने के कारण बुधवार को ही इसवर्ष चौठचन्द्र पर्व मनाया जाएगा। जबकि गणेश पूजा की शुरूआत गुरुवार से होगी।

डॉ. झा ने कहा कि मिथ्या कलंक चन्द्रदर्शन से निवृत्ति के लिए बुधवार की संध्या सभी को अपने हाथों में दहि, फल-पुष्प ग्रहण कर चंद्रमा का दर्शन करना चाहिए। जिससे मिथ्या कलंक से छुटकारा तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

------------ यह व्रत निर्जला किया जाता है। मिथिला में इस व्रत का काफी महत्व रहा है। व्रती भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की मूर्ति बनाकर पूजा करती हैं। इस व्रत का यह नियम है। व्रत से मनोकामनाएं पूर्व होती हैं।

- उषा देवी इस व्रत को एक बार प्रारंभ करने पर हर साल पूरे नियम से किया जाता है। महिलाएं एकत्रित होकर रतजगा करती हैं। पूरी रात व्रती भजन-कीर्तन में गुजारती हैं। निष्ठा के साथ व्रत किया करना चाहिए।

- तृप्ति

Posted By: Jagran