मधुबनी। दो दिन पहले तक दिल्ली के आनंद बिहार, हरियाणा व उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों का जो दृश्य दिख रहा था। वही अब बिहार के राष्ट्रीय राजमार्गों पर देखने को मिल रही है। पूरा देश लॉकडान की स्थिति में है। मगर, दो दिनों से एनएच-57 पर लॉकडाउन कहीं नहीं दिख रहा। यूपी, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी बंगाल व मुंबई की ओर से आने वाले लोग किसी भी तरह घर तक पहुंचने के लिए भागे चले जा रहे हैं। एनएच-57 पर क्या रात क्या दिन। यहां जो भी फल, सब्जियां, अनाज व अन्य आवश्यक सामान ले जा रहे वाहन गुजर रहे, उसमें लोग भरे रहते हैं। यहां ना तो फिजिकल डिस्टेंसिग का पालन हो रहा है ना ही इसकी कोई चिता है। जिन वाहनों पर 15 लोगों का बैठना भी मुश्किल है उन वाहनों पर 50 से 60 की संख्या में किसी तरह लोग लटक कर जा रहे हैं। कोई चार दिनों से भूखा तो कोई तीन दिनों से खाना नहीं खाया।

ठेलों पर, पिकअप पर, मालवाहक वाहनों पर, ट्रकों की छत पर लदे सामान पर मधुमक्खी के छत्ते की तरह जान जोखिम में डाल लटके हुए लोगों को जाते देख वर्तमान स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

भूख से बेहाल, बस कहीं पानी मिल जा रहा तो बुझ जा रही प्यास

पश्चिम बंगाल के हावड़ा से आ रहे पिकअप पर कुल 62 लोग सवार थे। इसमें बच्चे, वृद्ध, युवा, औरतें सब। हावड़ा से मोतिहारी जा रहे दिनेश, लखन, जयराम, गगन, देव, ओम प्रकाश, रामसखी व चंदा को टटोला गया तो दर्द छलक पड़े। आंसू पूछते हुए बताया कि वे लोग हावड़ा में कारखानों में मजदूरी करते थे। काम बंद होने की वजह से उन सबों को कंपनी से निकाल दिया गया है। ना तो रहने को घर था और ना ही खाने को पैसे। किसी तरह सबने मिलकर एक पिकअप किराए पर लेकर घर की ओर चल दिया है। रास्ते में कहीं भी कुछ भी खाने को नहीं मिला है। पिछले दो दिनों से वे लोग निरंतर भूखे चले आ रहे हैं। बस रास्ते में पीने को पानी मिल जा रही है। वहीं हरियाणा के गुरुग्राम से पैदल चले आ रहे कमलेश, सुरेश, प्रीतम, सुनैना आदि हाथों में थैला, कंबल, चादर लिए चले आ रहे थे। पूछा गया तो बताया कि वे लोग शुक्रवार को ही गुरुग्राम से चले हैं। रास्ते में कहीं कोई ट्रक मिल गया। उसपर चढ़कर कुछ दूर आ गए। अब पैदल ही पूíणया के लिए चल पड़े हैं। वही सड़कों पर जा रहे इन ठेलों, ट्रक ,पिकअप पर ओवरलोड लोग भूख प्यास और कोरोना वायरस से डरे सहमे जान हथेली पर लेकर चले जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में इन वाहनों के हादसाग्रस्त हो जाने की आशंका भी बनी रहती हैं। साथ ही फिजिकल डिस्टेंसिग नहीं रहने की वजह से करोना वायरस के संक्रमण की जो भयावता है उसका डर अलग से।

कुछ देर के लिए जगा पुलिस प्रशासन

दोपहर बाद सकरी थानाध्यक्ष अशोक कुमार एक्टिव मोड में आए। हाईवे पर गुजरने वाली वाहनों को रोक जानकारी लेनी प्रारंभ की। आने जाने वाले लोगों की डिटेल्स वाहनों की जानकारी रजिस्टरों पर लिखी जाने लगे। मगर, उन भूखे, लाचार, मजदूर, गरीबों के लिए भोजन पानी की कहीं कोई व्यवस्था नहीं। सूत्रों की माने तो प्रखंड के सभी गांव में देर रात भारी संख्या में बाहरी लोग आने लगे हैं। हालात यह है कि बीती रात कुछ गांवों में एंबुलेंस में भरकर लोग पहुंचे हैं। कुछ लोग 50 से 70 हजार में दिल्ली, हरियाणा आदि जगहों से पिकअप, ट्रक किराए पर लेकर जा रहे हैं। इन आने वाले लोगों की ना तो कहीं मेडिकल जांच हो रही और ना ही इन्हें ग्रामीण लोगों से दूर क्वारंटाइन की व्यवस्था कर सरकारी भवनों या विद्यालयों में रखे जा रहे हैं। वहीं लोगों की अज्ञानता की वजह से ऐसा कुछ नहीं हो पा रहा है। हालात यह है कि आने वाले लोगों को जब गांव वाले या कोई पूछते हैं कि वे कहां से आ रहे हैं ते वे आसपास के की शहर का नाम लेते हैं। किसी दूसरे राज्यों का नाम कहने से डरते हैं। वही एनएच पर लगातार लॉकडाउन टूटने से स्थिति विकट होती जा रही है। यही हालत रही तो संक्रमण को फैलने से रोकना मुश्किल हो जाएगा।

Posted By: Jagran

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