मधुबनी । इस साल मानसून ने आमलोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मूसलाधार बारिश के कारण एक तरफ जहां ग्रामीण क्षेत्रों में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, वहीं दूसरी ओर किसानों के खेतों में अधिक मात्रा में पानी लग जाने से खरीफ फसल के साथ-साथ हरी सब्जी की फसल नष्ट हो गई है। इससे बाजारों में हरी सब्जी की किल्लत दिखने लगी है। कुछ किसान हरी सब्जी लेकर बाजार तो आते हैं, लेकिन मनमाने कीमत के कारण गरीब व आमलोग खाली झोले लेकर वापस लौट जाते हैं। मानसून के कारण इन दिनों आमलोगों को महंगाई की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तो महंगे दर पर सब्जियां खरीदनी पड़ रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि ज्यादातर दुकानदार अधिकृत बटखारे के बजाय पत्थर से सामान तौलकर बेचते हैं जो अपेक्षाकृत कम वजन का होता है। इससे गरीब व आमलोगों को महंगाई की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। यह बातें कुछ सार्वजानिक बाजारों के पड़ताल में सामने आई है। यहां कई बाजार है जहां 90 फीसदी व्यापारी पत्थर से तौलकर सामान बेचते नजर आते हैं। हरी सब्जी खरीदने सार्वजानिक बाजार से लौट रहे लोगों ने इन बातों की पुष्टि भी की है। लोगों ने यह भी कहा कि बारिश के कारण बाजार नहीं लगने से अगले दिन विक्रेता गांव में घूमकर सब्जी बेचते हैं। जहां लोग अपनी जरुरत के हिसाब से ऊंचे दर पर पत्थर से तौलकर सब्जी खरीदने के लिए मजबूर होते हैं। लोगों ने बताया कि सभी सार्वजानिक बाजारों में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंचते हैं, लेकिन किसी का ध्यान इस दिशा में नहीं जाने के कारण आमलोगों को यह परेशानी उठानी पड़ रही है।

-------------- ग्रामीण बाजारों में हरी सब्जी की कीमत :

आलू - 18 से 24 रुपये प्रति किलो

परवल - 60 से 80 रुपये प्रति किलो

बैगन - 40 से 60 रुपये प्रति किलो

करेला - 40 से 60 रुपये प्रति किलो

भिडी - 40 से 50 रुपये प्रति किलो

कटहल - 40 से 60 रुपये प्रति किलो

टमाटर - 60 रुपये प्रति किलो

वीन - 60 रुपये प्रति किलो

Edited By: Jagran