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Bihar News : केंद्रीय विद्यालय में संविदा शिक्षक बहाली स्थगित, एनटीटी प्रमाणपत्रों पर सवाल

Published: Fri, 18 Sep 2026 08:39 PM (IST)

मधुबनी और झंझारपुर केंद्रीय विद्यालयों में संविदा शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई है। यह ...और पढ़ें

इसमें एआई जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें एआई जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

जागरण संवाददाता, मधुबनी। नवसृजित केंद्रीय विद्यालय मधुबनी और झंझारपुर में संविदा शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया एक बार फिर स्थगित कर दी गई है।

दोनों विद्यालयों के प्रभारी प्राचार्य की ओर से 17 सितंबर को सूचना जारी कर कहा गया है कि संविदा भर्ती अगले आदेश तक स्थगित रहेगी।

अब अगले साल जनवरी-फरवरी में जब अन्य केंद्रीय विद्यालयों में बहाली होगी, तभी इन दोनों विद्यालयों के लिए भी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसकी पुष्टि झंझारपुर केंद्रीय विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य ने की है।

इससे पहले पच्चीस अगस्त को जवाहर नवोदय विद्यालय रामपट्टी में वाक इन साक्षात्कार रखा गया था। इसमें प्राथमिक शिक्षक, कंप्यूटर अनुदेशक, संगीत प्रशिक्षक और बालवाटिका शिक्षक के पद शामिल थे।

साक्षात्कार में शामिल होने के लिए हजारों अभ्यर्थी पहुंच गए थे। भीड़ के कारण विद्यालय परिसर से लेकर मुख्य सड़क तक जाम और अफरातफरी की स्थिति बन गई थी। इसके बाद छब्बीस अगस्त को जिला जनसंपर्क कार्यालय ने साक्षात्कार स्थगित करने की सूचना दी थी।

प्रशासन के अनुसार दोनों विद्यालयों में बालवाटिका से कक्षा पांच तक पढ़ाई होनी है। प्रत्येक विद्यालय में छह-छह बालवाटिका शिक्षक, छह-छह प्राथमिक शिक्षक, एक-एक कंप्यूटर अनुदेशक और एक-एक संगीत प्रशिक्षक के संविदा पद हैं। यह नियुक्ति पूरी तरह संविदा पर है और नियमित नियुक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है।

बहाली को व्यवस्थित करने के लिए आवेदन छांट कर सूची जारी की गई थी। एक सूची में पांच सौ उनहत्तर और दूसरी बालवाटिका सूची में पांच सौ इकतीस अभ्यर्थियों के नाम थे। वहीं प्रभार में मौजूद प्राचार्य के अनुसार दोनों विद्यालयों के लिए करीब चार हजार आवेदन आए हैं। छह पद के लिए इतने आवेदन आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

बालवाटिका शिक्षक के लिए क्या है निर्धारित योग्यता

केंद्रीय विद्यालय संगठन की सूचना के अनुसार बालवाटिका शिक्षक के लिए बारहवीं में कम से कम पचास प्रतिशत अंक होना चाहिए। साथ ही नर्सरी शिक्षक शिक्षा या प्री स्कूल शिक्षा या अर्ली चाइल्डहुड शिक्षा में दो वर्ष से कम अवधि का नहीं होने वाला डिप्लोमा या बीएड नर्सरी होना चाहिए।

यह डिप्लोमा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त संस्थान से होना जरूरी है। अब सवाल उठ रहा है कि निजी संस्थानों के एनटीटी प्रमाणपत्र को इस निर्धारित डिप्लोमा के समकक्ष किस आधार पर माना जा रहा है।

जांच के दायरे में आए निजी संस्थान

स्थानीय स्तर पर कई निजी संस्थान एनटीटी कोर्स को सरकारी नौकरी और केंद्रीय विद्यालय में बालवाटिका शिक्षक के लिए मान्य योग्यता बताकर प्रचार कर रहे हैं। इसके लिए अभ्यर्थियों से पांच हजार से तीस हजार रुपये तक शुल्क लेने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि कुछ संस्थान पिछले सत्र की तिथि में प्रमाणपत्र देने की पेशकश भी कर रहे हैं। यह जांच का विषय है।

क्या कहते हैं प्राचार्य

दरभंगा केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य ऋषि रमन मिश्रा के पास झंझारपुर का प्रभार है। उन्होंने बताया कि मौजूदा सत्र में चार माह ही बचे हैं, इसलिए जिलाधिकारी और उच्च अधिकारियों के निर्णय पर भर्ती नए सत्र से होगी।

एनटीटी पर उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर इसकी कोई गाइडलाइन नहीं है, यह गैर सरकारी संगठन स्तर पर चल रहा है और इसकी प्रामाणिकता जांचने का उनके पास साधन नहीं है।