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मधुबनी में 300 साल पुरानी परंपरा, दुर्गा पूजा में मुस्लिम महिलाएं भरती हैं मां का खोइछा

Published: Mon, 05 Oct 2026 07:30 AM (IST)

बेनीपट्टी के अड़ेर पूवाई टोल में शारदीय नवरात्र की तैयारी जोरों पर है, जहां 300 वर्षों से वैदिक और तांत्रिक ...और पढ़ें

दुर्गा मंदिर परिसर में बन रहा भव्य पंडाल। जागरण

दुर्गा मंदिर परिसर में बन रहा भव्य पंडाल। जागरण

HighLights

  1. बेनीपट्टी के अड़ेर पूवाई टोल में नवरात्र की तैयारी।

  2. 300 वर्षों से वैदिक एवं तांत्रिक पद्धति से पूजा।

  3. मुस्लिम समुदाय का सक्रिय योगदान, सामाजिक सद्भाव की मिसाल।

संवाद सहयोगी, बेनीपट्टी (मधुबनी)। आगामी 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र को लेकर बेनीपट्टी प्रखंड के दुर्गा मंदिरों में चहल-पहल शुरू हो गई है।

प्रखंड के 31 गांवों में मां दुर्गा की भव्य पूजा की तैयारी है, लेकिन इनमें अड़ेर पूवाई टोल की पूजा सबसे अनोखी और सामाजिक सद्भाव की मिसाल है।

यहां पर मुस्लिम भाई मां को छागर चढ़ाते हैं तो महिलाएं खोइछा भरती हैं। यहां 300 वर्षों से वैदिक एवं तांत्रिक पद्धति से मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है।

मंदिर परिसर में पंडाल और प्रतिमा निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। मंगरौनी के मूर्तिकार दिलीप कुमार पंडित चौठचंद की सुबह से ही प्रतिमा गढ़ने में जुटे हैं। परंपरा के अनुसार प्रतिमा के लिए मिट्टी अनुसूचित जाति के परिवार के लोग तैयार कर लाते हैं।

पूजा समिति के अध्यक्ष देव नारायण झा, भगवान झा, विजय कुमार मिश्र, मकसुदन झा और विमल झा ने बताया कि इस वर्ष पूजा पर 20 लाख रुपये से अधिक खर्च होगा, जिसकी पूर्ति समाज के सहयोग से की जाती है।

आचार्य, यजमान सहित 11 पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजा-पाठ किया जाता है। इस पूजा को सामाजिक सद्भाव का प्रतीक कहा जाता है। गांव के मुस्लिम भाई मन्नत मांगते हैं और मन्नत पूरी होने पर हिंदू भाइयों के माध्यम से मां के दरबार में छागर की बलि के लिए बकरा खरीद कर देते हैं।

शारदीय नवरात्र में यहां एक हजार से अधिक छागरों की बलि दी जाती है, हालांकि बलि की परंपरा बारहों मास चलती है। सबसे खास बात यह है कि सप्तमी-अष्टमी को दर्जनों मुस्लिम महिलाएं मन्नत पूरी होने पर मंदिर परिसर में आकर माता की खोइछा भरती हैं।

नवरात्र में पूरे गांव में लाइट, साउंड और भव्य सजावट की व्यवस्था की जा रही है। पूजा के सुचारू संचालन के लिए अलग-अलग विभाग बनाए गए हैं।

मंदिर और पंडाल की सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती है। महाआरती के दौरान दरबार में भारी भीड़ उमड़ती है। पूजा के अवसर पर जागरण कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा।