मधुबनी : जमीन के डेढ़ बित्ता पर गाड़ा खूंटा, फिर तड़तड़ा उठी पिस्तौल, डबल मर्डर में संजय झा को उम्रकैद
मधुबनी के झंझारपुर कोर्ट ने जमीन विवाद में हुए दोहरे हत्याकांड के आरोपी संजय कुमार झा को उम्रकैद की सजा ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
डेढ़ बीघा जमीन विवाद में हुई थी गोलीबारी।
दो लोगों की मौत, तीन अन्य हुए थे घायल।
संजय झा को दोहरे हत्याकांड में उम्रकैद की सजा।
जागरण संवाददाता, झंझारपुर (मधुबनी)। जमीन का विवाद कभी-कभी ऐसी खूनी कहानी लिख देता है, जिसकी कीमत परिवारों को वर्षों तक चुकानी पड़ती है। फुलपरास में जमीन के महज डेढ़ बित्ता हिस्से पर खूंटा गाड़ने को लेकर शुरू हुआ विवाद गोलियों की तड़तड़ाहट में बदल गया था।
देखते ही देखते दो लोगों की जान चली गई और तीन लोग घायल हो गए। करीब ढाई साल बाद गुरुवार को अदालत ने इस दोहरे हत्याकांड के दोषी संजय कुमार झा को उम्रकैद की सजा सुनाई।
दो धाराओं में सुनाई सजा
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय, झंझारपुर अनिल कुमार राम की अदालत ने फुलपरास थाना कांड संख्या 49/2024 एवं सत्रवाद 212/2024 में सुदई निवासी संजय कुमार झा को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
आईपीसी की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड नहीं देने पर नौ माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
धारा 307 में पांच वर्ष की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई अवधि का समायोजन किया जाएगा।
डेढ़ बीता जमीन पर खूंटा बना विवाद की वजह
अपर लोक अभियोजक देवशंकर झा ने बताया कि सूचिका अंजू देवी उर्फ अंजू झा ने सात फरवरी 2024 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि जमीन पर डेढ़ बीता बढ़ाकर खूंटा गाड़ने का संजय झा ने प्रयास किया। इसका विरोध करने पर उसने पिस्तौल से गोली चला दी।
फायरिंग में दो की मौत, तीन हुए घायल
फायरिंग में अशोक झा और विमला देवी की मौत हो गई थी। वहीं शम्भूनाथ झा, बमबम झा और राकेश कुमार पासवान घायल हुए थे। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी।
मृतक की पत्नी को मिलेगा मुआवजा
अदालत ने मृतक अशोक झा की पत्नी अंजू देवी को बिहार विक्टिम कंपनसेशन स्कीम-2014 के तहत मुआवजा देने का आदेश जिला विधिक सेवा प्राधिकार, मधुबनी के सचिव को दिया है। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता परशुराम मिश्रा ने पैरवी की। सूचिका की ओर से अधिवक्ता लक्ष्मेश्वर सिंह ने फैसले को न्याय की जीत बताया।
