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27 करोड़ की लागत से मधुबनी के कल्याणेश्वर महादेव और विश्वामित्र स्थान का होगा विकास

By Manoj Jha Edited By: Ajit kumar
Published: Mon, 11 May 2026 07:11 PM (IST)

मधुबनी के हरलाखी प्रखंड में कल्याणेश्वर महादेव और विश्वामित्र स्थान को अब पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। ...और पढ़ें

यह तस्वीर इंटरनेट मीडिया से ली गई है।

यह तस्वीर इंटरनेट मीडिया से ली गई है। 

संवाद सहयोगी, हरलाखी (मधुबनी)। Kalyaneshwar Mahadev: जिले के हरलाखी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक कल्याणेश्वर महादेव स्थान और विश्वामित्र स्थान को अब पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। बिहार सरकार के पर्यटन विभाग ने दोनों स्थलों के विकास के लिए करीब 27 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर दी है।

छह जून को होगी टेंडर प्रक्रिया

यह विकास कार्य बिहार सरकार पर्यटन विकास निगम लिमिटेड के माध्यम से कराया जाएगा। विभाग की ओर से आगामी छह जून को टेंडर प्रक्रिया की तिथि निर्धारित की गई है।

टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों स्थलों पर विकास कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

अलग-अलग राशि स्वीकृत

सरकार की ओर से कलना गांव स्थित कल्याणेश्वर महादेव स्थान के विकास के लिए 13 करोड़ 60 लाख 99 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं।

वहीं विशौल गांव स्थित विश्वामित्र स्थान के लिए 13 करोड़ 28 लाख 63 हजार रुपये की राशि स्वीकृत हुई है।

रामायणकालीन स्थलों से जुड़ाव

स्थानीय लोगों के अनुसार कल्याणेश्वर महादेव स्थान, विश्वामित्र स्थान, फुलहर स्थान और करुणा स्थान का संबंध रामायण काल से जुड़ा हुआ है।

इन स्थानों का महत्व भगवान श्रीराम और माता जानकी के विवाह प्रसंग से माना जाता है। इसी कारण यहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूरदराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

कल्याणेश्वर महादेव स्थान का महत्व

मान्यता के अनुसार कलना गांव स्थित कल्याणेश्वर महादेव स्थान मिथिलाधाम का प्रथम द्वार माना जाता था। कहा जाता है कि विदेह राज जनक ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी।

रामायणकालीन महत्व होने के बावजूद यह स्थल लंबे समय से विकास से वंचित था। अब इसे पर्यटन मानचित्र पर लाने की तैयारी शुरू हो गई है।

विश्वामित्र स्थान से जुड़ी पौराणिक कथा

विशौल गांव स्थित विश्वामित्र स्थान को लेकर मान्यता है कि यहां राजा जनक का सुंदर सदन नामक भवन हुआ करता था।

कहा जाता है कि माता सीता के स्वयंवर में शामिल होने के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और गुरु विश्वामित्र इसी स्थान पर ठहरे थे। बाद में यह स्थल विश्वामित्र स्थान के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

स्थानीय लोगों में खुशी

दोनों ऐतिहासिक स्थलों के विकास की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी।