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पद्मभूषण डॉ अनिल जोशी का मधुबनी से दुनिया को संदेश, प्रकृति ही सबसे बड़ा भगवान और धर्म

Published: Sat, 03 Oct 2026 03:23 PM (IST)

Dr Anil Joshi Cycle Yatra: पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की 'प्रकृति पद राष्ट्रीय साइकिल यात्रा' नेपाल से मधुबनी के ...और पढ़ें

प्रकृति पद साइकिल यात्रा के दौरान मधुबनी के जयनगर से रहिका की ओर जाती पद्मभूषण डा. अनिल जोशी और उनकी टीम। सभी फोटो जागरण

प्रकृति पद साइकिल यात्रा के दौरान मधुबनी के जयनगर से रहिका की ओर जाती पद्मभूषण डा. अनिल जोशी और उनकी टीम। सभी फोटो जागरण

संवाद सहयोगी, रहिका/जयनगर (मधुबनी)। Natureman Anil Joshi Madhubani: पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का संदेश लेकर प्रकृति पद राष्ट्रीय साइकिल यात्रा पर निकले पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी का जत्था नेपाल के जनकपुर से भारतीय सीमा में प्रवेश कर जयनगर पहुंचा।

जयनगर में रात्रि विश्राम करने के बाद शनिवार सुबह जत्था आगे के लिए रवाना हुआ। यह दल कलुआही, लोहरा, पोखरौनी और रहिका होते हुए ककरौल दक्षिणी पंचायत भवन पहुंचा।

16 सदस्यीय दल का स्वागत

पद्मभूषण और जमनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित डॉ. जोशी के नेतृत्व में 16 सदस्यीय दल ककरौल पहुंचा। वहां स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि मो. प्यारे और ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया।

इस दल में डॉ. जोशी के साथ 14 शिष्य साइकिल से चल रहे हैं, जो लगातार लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

dr anil joshi cycle yatra reach madhubani environment awareness 1

प्रकृति सबसे बड़ा भगवान

ककरौल पंचायत भवन में आयोजित जनसंवाद के दौरान डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि प्रकृति का साथ छोड़ना बहुत गंभीर विषय है।

हमने घरों और शहरों में तो मंदिर बना लिए हैं, लेकिन जो प्रकृति हमें हवा, पानी और भोजन देती है, उसे नमन करना भूल रहे हैं। प्रकृति और प्रभु में कोई अंतर नहीं है।

सबको चाहिए स्वच्छ हवा

उन्होंने कहा कि प्रकृति ही सबसे बड़ा भगवान और सबसे बड़ा धर्म है। चाहे किसी भी धर्म या जाति का व्यक्ति हो, सभी को जीवित रहने के लिए पानी और प्राणवायु की आवश्यकता होती है।

कोई पेड़ या नदी किसी व्यक्ति में भेद नहीं करती है। इसलिए प्रकृति का संरक्षण ही ईश्वर की सच्ची उपासना और पूजा है।

कोरोना ने सिखाई कीमत

डॉ. जोशी ने जंगल, जल और धरती को बचाने की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोविड काल में जब सांस लेने में तकलीफ हुई, तब लोगों को प्राणवायु की असली कीमत समझ में आई।

वर्ष 2008 से अब तक यह उनकी पांचवीं 3000 किलोमीटर की यात्रा है। यह दल बिहार के विभिन्न जिलों से होते हुए देवघर पहुंचेगा।

आजीविका और पर्यावरण संतुलन

नेचर नेटवर्क संस्था द्वारा आयोजित इस यात्रा में कई युवा कार्यकर्ता भी शामिल हैं। यात्रा के दौरान सभी सदस्य सादा भोजन ही ग्रहण करते हैं।

दल के सदस्य देवेश कोठारी और अनिल डंगवाल ने बताया कि वे गुरु जी के मार्गदर्शन में पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण पर्यटन और चक्की से आजीविका व बिजली निर्माण का कार्य कर रहे हैं।

पंचायती राज का सहयोग

रहिका के प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी अमितेश कुमार ने बताया कि राज्य स्तर से विभागीय परियोजना निदेशक नवीन कुमार सिंह द्वारा पत्र जारी किया गया था।

उसी आलोक में डॉ. अनिल जोशी की साइकिल यात्रा के समन्वय, पंचायत भवन में ठहराव और जनसंवाद के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं।

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