मधुबनी। चार दिवसीय सूर्योपासना का महापर्व चैती छठ पूजा के लिए शनिवार को खरना अनुष्ठान संपन्न हुआ। भक्तिमय माहौल में व्रतियों ने घरों में खरना का प्रसाद तैयार कर भगवान को भोग लगाया। रविवार को डूबते सूर्य और सोमवार को उगते सूर्य को अ‌र्घ्य अर्पण किया जाएगा।

पंडित पीताम्बर झा ने बताया कि चैती छठ पूजा के लिए संध्या अ‌र्घ्य शाम छह बजकर 22 पर तथा प्रात: कालीन अ‌र्घ्य पांच बजकर 38 मिनट तक अर्पित किया जा सकता है। कोरोना संक्रमण के कारण व्रतियों ने तालाब घाट की बजाय अपने छत-आंगन से ही अ‌र्घ्य अर्पित करने की तैयारी पूरी कर ली है। छठ पूजा संबंधी सामग्री की खरीदारी शनिवार को चलती रही। किराना दुकानों पर त्योहार संबंधी सामग्री मिलने मे कोई दिक्कत नहीं हो रही है। फल बाजार में केला की आवक कम होने से इसकी कीमत में उछाल देखी गई। सेब, नारंगी के मूल्य में इजाफा देखा गया। बाजार में नारियल, मूली सहित अन्य पूजा सामग्री की खरीदारी लोगों ने की।

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आस्था का प्रतीक छठ पूजा में कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए तालाब की जगह आंगन से ही सूर्यदेव को अ‌र्घ्य अर्पण किया जाना चाहिए।

- शिवकुमारी देवी

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स्वच्छता में ईश्वर का वास होता है। घर में चैती छठ का अनुष्ठान संपन्न से पूरी तरह स्वच्छता का पालन संभव होगा। कोरोना संक्रमण से भी बचा जा सकता है।

- लक्ष्मी कुमारी

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नामारकंडेय पुराण में कहा गया है कि स्त्रिय: समस्ता सकला जगत्सु। प्रकृति देवी के एक प्रधान अंश को हम देवसेना कहते है जो सबसे श्रेष्ठ मातृका मानी जाती हैं, जो समस्त लोकों के संतानों की रक्षिका देवी हैं।

- पं. आनन्द झा

पुराणों में छठ पूजा के लिए पंचमी को एक बार शुद्ध भोजन। षष्ठी को निराधार रहकर नदी तट पर फल, पुष्प, नैवेद्य, धूप, दीप के साथ हर्ष पूर्वक अस्ताचलगामी भगवान सूर्य का अ‌र्घ्य समर्पित तथा दूसरे दिन उदीयमान सूर्य को अ‌र्घ्य समर्पित कर पारण का विधान बताया गया है।''

- विनायक झा

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