मधुबनी। बरैल कोसी नहर से निकलकर बरहारा-अंधराठाढी-झंझारपुर जाने वाली शाखा नहर को पश्चिमी कोसी नहर विभाग द्वारा बंद कर दिया गया है। बरैल साईफन पर ईंट की दीवार बना कर इसे सील किया गया है। पानी का बहाव इस नहर में पूरी तरह बंद हो गया है। इससे किसानों में त्राहिमाम की स्थिति हो गई है। इनके गेहूं ,दलहन व अन्य सब्जियों की फसलें मुरझाने लगी हैं। पूर्व से ही आर्थिक तंगेहाली से जूझ रहे किसानों में आक्रोश है। बरहारा के किसान रामसागर यादव, पूर्व मुखिया बदरे आलम, पूर्व जिला पार्षद रजनी देवी, हरे राम मंडल, सिकंदर चौधरी ने कहा कि अगर नहर को सील किया जाना था तो इसकी सूचना पूर्व में किसानों को दी जानी चाहिए। अब तो ये लोग सूद पर रुपये लेकर खून पसीना एक कर अपने खेतों में फसल लगा चुके हैं।

विभागीय क्रियाकलाप से ये लोग मानसिक अवसाद से गुजर रहें हैं। इस शाखा नहर से बरहारा, बसहा, रहिकपुर, अंधराठाढी, चंदेश्वर स्थान होते झंझारपुर तक के इलाकों के किसानों के हजारों एकड़ भूमि में पटवन होता था।

उड़ाही के कारण किया बंद

इस बारे में कार्यपालक अभियंता चंदेश्वर प्रसाद ने कहा कि सिल्ट व अन्य अवशेष से इस शाखा नहर के स्वरूप में परिवर्तन हो गया है। इस कारण इसकी जल ग्रहण क्षमता कम हो गई हैं। इसे पूर्व के रूप में लाने को उड़ाही का निर्देश विभाग से प्राप्त हुआ है। आरडी शून्य से 138 तक ये काम होगा। इसमें 18 माह लगने की संभावना है। ऐसा होने से नहर की जलग्रहण क्षमता डेढ़ गुनी से अधिक हो जाएगी। अधिकाधिक किसान इससे लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इसलिए इसे बंद किया गया है।

Posted By: Jagran

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