मधुबनी। भाषारूपी बगिया में हिन्दी की महक का क्या कहना। ये जिधर भी जाती है प्रेम और भाईचारा स्थापित कर जाती है। सीमाओं से परे हिन्दी अपनी पहुंच संसार के कोने-कोने तक बना चुकी है। ¨हदी से हमारी राष्ट्रीयता की पहचान होती है। हिन्दी बोलने वाले अन्य भाषी लोगों की भी गरिमा बहाल होती है।

¨हदी दिवस की महता पर चर्चा करते हुए अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व साहित्यकार डॉ. बैद्यनाथ यादव ने कहा कि ¨हदी है ही हमारी ऐसी कि इसका जितना भी बखान करें कम साबित होता है। ¨हदी साहित्य भंडार निरंतर बढ़ रहा है। यह सर्वव्यापकता की ओर जा रही है। सरलता के कारण यह लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में अपना विस्तार कर रही है। हांलाकि अभी ¨हदी को काफी सफर तय करना है। इसमें सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों, ¨हदी साहित्यकारों, कवियों को विशेष रुप से आगे आना होगा। ¨हदी की कविता, कहानी, समाचार पत्र ने राष्ट्र स्तर पर ¨हदी को स्थापित करने में लगे हैं। हिन्दी भारत की आत्मा है। इसे पल्लवित करने की जरूरत है। समाज में परिकृष्ट हिन्दी रूपों का दर्शन कम हो पाता है। श्री यादव ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा से ही शुद्दोचारण के द्वारा परिमार्जित हिन्दी भाषा का ज्ञान देना चाहिए। हिन्दी के अनेकों उत्कृष्ट साहित्य का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद में तेजी आई है। हिन्दी की सेवा देश सेवा से कम नहीं। ----------------------- देश की विभिन्न भाषाओं के बीच हिन्दी की अलग पहचान

फोटो 9 एमडीबी 28 ¨हदी अपने विशिष्टता के बदालत आगे बढ़ रही है। कई ¨हदी साहित्य संगठन भाषा विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। जो ¨हदी विकास का द्योतक है। हृदय की पुकार रूपी हिन्दी देश की एकता, भाईचारा का प्रतिक साबित हो रहा है। देश की विभिन्न भाषाओं के बीच हिन्दी की अलग पहचान रही है। हिन्दी दिवस की महता पर साहित्यकार ध्रुव नारायण त्रिपाठी कहते है कि भाषाओं की बिन्दी रूपी हिन्दी की सुन्दरता में और निखार की जरूरत है। बोलचाल में हिन्दी का प्रयोग करने से अपनापन का अनुभव होता है। हिन्दी ही एक ऐसी भाषा है जिसे कोई भी आसानी से सीख-बोल सकता है। हिन्दी का विकास देश के विकास से जुड़ा है। सहज व आसान भाषा के रूप में हिन्दी को देश भर में प्रचलित बनाकर एकता का परिचय देना चाहिए। श्री त्रिपाठी का कहना है कि विभिन्न भाषाओं में उत्तम हिन्दी में पठन-पाठन व इसके विकास से सामाजिक एकता की झलक मिलती है। हिन्दी जीवन की धारा बन गई है। हिन्दी के विकास के लिए हिन्दी भाषी साहित्यकारों का प्रयास निरंतर जारी रहा है। अच्छी-अच्छी हिन्दी की साहित्य हिन्दी के विकास में मिल का पत्थर साबित हुआ है।

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