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जहां बसे हैं प्रभु श्रीराम, वहीं चोरी! माता जानकी के मायके में गूंजा सवाल-अब अयोध्या भी सुरक्षित नहीं?

Published: Fri, 03 Jul 2026 06:46 PM (IST)

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से मिथिलावासी चिंतित हैं, क्योंकि वे मंदिर को माता जानकी का ससुराल ...और पढ़ें

जनकपुरधाम स्थित माता जानकी का गर्वगृह । जागरण

जनकपुरधाम स्थित माता जानकी का गर्वगृह । जागरण

HighLights

  1. अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से मिथिलावासी चिंतित।

  2. जनकपुरधाम के महंत ने भेजे गए उपहारों पर सवाल उठाया।

  3. भारतीय अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।

संवाद सहयोगी। हरलाखी (जनकपुर)। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में हुई चढ़ावे व चंदा की चोरी मिथिलावासियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

दरअसल वर्षों की तपस्या व संघर्ष के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर बनना मिथिलावासियों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय बना हुआ था। लेकिन दुनिया के सबसे सुरक्षित मंदिर में हुई चोरी से मिथिलावासी क्षुब्ध हैं। चुकी इस मंदिर को बनाने में मिथिलावासियों ने अपनी सम्पूर्ण आस्था व श्रद्धा झोंक दिया था।

इस मंदिर के भूमिपूजन से लेकर गृहप्रवेश तक मिथिला ने सभी रस्म निभाए जो एक बेटी के मायके के द्वारा निभाया जाना चाहिए। ऐसा हो भी क्यों नहीं, चुकी अयोध्या का श्रीराम मंदिर मिथिला की बेटी माता जानकी का ससुराल जो है।

इस नाते मिथिलावासी श्रीराम मंदिर को अपने बेटी का घर बनने के इरादे से वो सभी कुछ दिया, जो मिथिला में पारंपरिक विधान है। इस संबंध में जानकारी देते हुए जनकपुरधाम स्थित माता जानकी के मंदिर का महंत रामतपेश्वर दास वैष्णवी ने बताया अयोध्या का श्रीराम मंदिर हमारे लिए अपनी बेटी का घर है।

वर्षो की तपस्या व संघर्ष के बाद अयोध्या में जब श्रीराम मंदिर बनने की प्रक्रिया शुरू हुई तो जनकपुरधाम में उत्सवी माहौल बन गया था। यहां के लोगों ने अपनी परंपरा के अनुसार व मंदिर बनने से लेकर गृहप्रवेश अर्थात प्राणप्रतिष्ठा तक उपहार भेजकर सभी रस्म निभाए।

इन रस्मो के दौरान जनकपुरधाम से वस्त्र, चांदी के खानेपीने की बर्तन व श्रृंगार के सामान के अलावा चांदीजड़ित ईंट, देवशीला, श्रीराम के लिए चांदी का तीरधनुष, चरणपादुका, अंगूठी, चेन, कुण्डल व मुकुट के साथ थाली, कटोरी, ग्लास व प्लेट सहित पूजा के बर्तन एवं माता जानकी के लिए सोने का हार, मंगलसूत्र, झुमका, मांगटीका, अंगूठी, डंरकस, हाथशंकर व बिछिया सहित श्रृंगार की सभी वस्तुएं भेजी गई थी।

लेकिन यहां से भेजे गए उपहारों का उपयोग कहां किया गया इसकी हमे कोई जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वहां से कुल कितने वजन के चांदी और सोने के सामान गये थे। उनका कहना था कि जानकी मंदिर के अलावा भी लोगों ने अपने आराध्य के लिये भेंट दिया था।

विश्व हिंदू परिषद से जुड़े राजेंद्र पंकज के माध्यम से चंपत राय तक पहुंचाया गया था। राजेंद्र पंकज पांच साल पर अयोध्या से आने वाली बारात में दशरथ की भूमिका में आते रहे हैं।

महंत का कहना है कि अब प्रभु श्रीराम के मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर हमलोगों के मन में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। क्या इस चोरी में यहां से भेजे गए उपहार भी शामिल है अथवा नहीं।

इस विषय को लेकर सम्पूर्ण मिथिलावासी चिंतित हैं। हालांकि भारतीय प्रशासनिक अधिकारियों ने इस चोरी की घटना का निष्पक्ष जांच करने का आश्वासन दिया है। जिसकी हमलोग प्रतीक्षा कर रहे हैं।