श्यामानंद मिश्र, मधुबनी : सेवा यात्रा के तीसरे दिन अपराह्न मुख्यमंत्री नीतीश कुमार परिसदन से चलकर जब जितवारपुर पद्मश्री स्व. सीता देवी, जगदंबा देवी, चानो देवी सहित दलित टोला व भास्कर कुलकर्णी हस्तकला आश्रम पहुंचे तो वहां उपस्थित कलाकार फूले नहीं समा रहे थे। उन्हें दिखाने के लिए सैकड़ों महिला कलाकार अपने हाथ से निर्मित विभिन्न स्वरूपों में मधुबनी पेंटिंग, सिक्की-मौनी, गोदना पेंटिंग, गोबर पेंटिंग, पेपर मेसी आदि लेकर आश्रम व घर में इंतजार कर रही थी। मुख्यमंत्री जितवारपुर से जब रांटी स्थित पद्मश्री महासुंदरी देवी के आंगन पहुंचे तो वहां का नजारा देख कुछ क्षणों तक भाव विभोर हो गए। मुख्यमंत्री को आंगन में बने मरवा पर आदर के साथ बैठाया गया जहां महान विभूति महासुन्दरी देवी भी मुख्यमंत्री के बगल में बैठी। मुख्यमंत्री ने मिथिला की 87 वर्षीया इस महान कलाकार से कई संस्मरण भी सुना और इस मुकाम तक पहुंचने के लिए किए गए उनके प्रयासों की जानकारी प्राप्त की। महासुन्दरी देवी का पूरा परिवार मुख्यमंत्री के स्वागत में जुटा था। महासुन्दरी देवी के घर पर ही उन्होंने मिथिलांचल को एक बड़ा तोहफा सौराठ में मधुबनी पेंटिंग प्रशिक्षण संस्थान खोलने का दिया। इसे सुन वहां मौजूद सैकड़ों मैथिल ललनाएं भावविभोर हो खुशी से गा उठी- 'धन-धन जागल भाग हे पाहुन छथि आयल'।

मौके पर मौजूद लोग बोलने लगे कि सचमुच सेवा यात्रा से मधुबनी व मिथिलांचल गौरवान्वित व अभिभूत है। सौराठ में इस संस्थान के खुल जाने से निसंदेह मिथिलांचल में विकास का मार्ग प्रशस्त होगा और इस क्षेत्र का संबंध देश के कोने-कोने व विदेश से सीधे जुड़ जाएगा। इस संस्थान के खुल जाने से विभिन्न विधाओं के कलाकारों का मिथिलांचल में समागम भी होने लगेगा। मुख्यमंत्री की इस घोषणा से मधुबनी व आसपास क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है। खासकर वैसे कलाकार जिन्होंने मधुबनी पेंटिंग को अपना पेशा बना रखा है उनके अंदर एक आस जग गई है।

महासुंदरी देवी के घर मिथिलांचल की परम्परा के अनुसार मुख्यमंत्री का पाग-दोपटा, पेंटिंग देकर भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री ने घर में बने पेड़ा का स्वाद भी चखा और प्रसन्नता जाहिर की। वे बीच बीच में मैथिली बोल कर महासुंदरी देवी व लोगों का स्नेह व प्यार भी पाते रहे।

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