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मधुबनी में मिली 800 साल पुरानी बौद्ध देवी तारा की प्रतिमा, क्या है इसमें खास?

Published: Sun, 31 May 2026 11:52 AM (IST)

बिहार के मधुबनी जिले के फुलहर गांव में बागतराग तालाब की खुदाई के दौरान 700-800 साल पुरानी बौद्ध देवी तारा की खंडित प्रतिमा और सुनहरे रंग के अवशेष मिले हैं।

फुलहर स्थान स्थित पौराणिक बागतराग तालाब

फुलहर स्थान स्थित पौराणिक बागतराग तालाब

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संवाद सहयोगी, हरलाखी। जिला के हरलाखी प्रखंड अंतर्गत फुलहर गांव स्थित प्रभु श्रीराम व माता जानकी की प्रथम मिलन स्थली में अवस्थित बागतराग के खुदाई में सात-आठ सौ साल पुरानी दुर्लभ अवशेष निकलना इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।

दरअसल बिहार सरकार के तत्वाधान में इस स्थान को पर्यटकीय रूप से विकसित करने का कार्य चल रहा हैं। इस दौरान पौराणिक बागतराग तालाब की खोदाई में सात-आठ सौ साल पुरानी बौद्ध देवी तारा की भंग प्रतिमा व सुनहरे रंग का अवशेष निकला है।

Baudh Devi Tara

(तालाब के खोदाई में निकला भंग प्रतिमा)

इसकी जानकारी मिलते ही पर्यटन विभाग के आर्किटेक माधव भारद्वाज ने फुलहर स्थान का मुआयना किया। आर्किटेक ने सबसे पहले स्थान में चल रहे निर्माण कार्य का मुआयना किया। तदुपरांत तालाब से निकले पुरावशेष का गहन अवलोकन किया।

तत्पश्चात आर्किटेक ने भी इन अवशेषों को 12वीं शताब्दी के आसपास का बताते हुए इसे बौद्ध देवी तारा का भंग प्रतिमा बताया। उन्होंने कहा इस भंग प्रतिमा पर उकेरा गया पाठ प्रसिद्ध बौद्ध श्लोक है। जिसे आमतौर पर धर्म मंत्र भी कहा जाता है।

बागतराग तालाब से इस भंग प्रतिमा व पुरावशेष का निकलना इस स्थान के पौराणिकता का प्रतीक है। इधर इन्टैक बिहार स्टेट के को कन्वेनर शिवकुमार मिश्र का भी कहना है कि यह भंग प्रतिमा बौद्ध देवी तारा की है।

इस प्रतिमा पर एक बौद्ध मंत्र उकेरा गया है, वहीं सुनहरे रंग के पुरावशेष पर कैथी लिपि में श्री सीताराम उत्कीर्ण है। उन्होंने मधुबनी जिलाधिकारी से इस भंग प्रतिमा व पुरावशेष को सरकारी संग्रहालय में संग्रहित करने की मांग की है।

बता दें कि इस ऐतिहासिक तालाब से पुरावशेष निकलने से स्थान के प्रति आमलोगों की जिज्ञासा बढ़ने लगी है। बहरहाल इस स्थान को पर्यटकीय रूप से विकसित करने का कार्य निरंतर जारी है। इस तालाब के उड़ाही में अन्य पुरावशेष निकलने की संभावना है।