संवाद सूत्र, मधेपुरा : स्कूली बच्चों में पढ़ाई के प्रति रूचि जगाने के लिए शुरू किया गया 100 दिवसीय पठन अभियान पहले चरण में दम तोड़ दिया है। मधेपुरा एसएसए द्वारा इस बाबत पत्र जारी होने के तीन दिन बाद भी यह अभियान जिले में शुरू नहीं हो पाया है। यद्यपि विभाग का कहना है कि ठंड एक बड़ी वजह है। लेकिन सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना ने धरातल पर पहुंचने से पहले दम तोड़ना जिला में शिक्षा की बिगड़ती स्थिति को दर्शा रहा है। मालूम हो कि इस अभियान का शुभारंभ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप किया गया है, जो स्थानीय मातृभाषा, क्षेत्रीय या जनजातीय भाषा में बच्चों के लिए आयु के अनुसार पठन पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करके बच्चों के लिए आनंदपूर्वक पठन संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर देने की पहल है। शिक्षाविद व मधेपुरा डायट के पूर्व प्राचार्य पूनम वर्मा बताती हैं कि यह अभियान पढ़ाई के महत्त्व को रेखांकित किया कि बच्चों को निरंतर और आजीवन सीखते रहना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि पढ़ने की आदत, अगर कम उम्र में पैदा की जाती है, तो यह मस्तिष्क के विकास में मदद करती है और कल्पना शक्ति को बढ़ाती है और बच्चों के लिए अनुकूल सीखने का माहौल प्रदान करती है। वे कहती है कि पढ़ना सीखने का आधार है, जो छात्रों को स्वतंत्र रूप से किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करता है, रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच, शब्दावली और मौखिक तथा लिखित दोनों में अपने विचार व्यक्त करने की क्षमता विकसित करता है। विभाग की सुस्ती आई सामने

इस अभियान के दम तोड़ने में शिक्षा विभाग का बड़ा योगदान है। राज्य से 29 दिसंबर को ही पत्र निर्गत हुआ है। इसके बाद जिलास्तर पर भी औपचारिक मानते हुए 31 जनवरी को पत्र जारी कर दिया गया। लेकिन बड़ी बात है कि क्रियांवयन पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। इस कारण यह अभियान शुरूआती दौर में ही पटरी से उतर गया। जबकि जानकार बताते हैं कि अगर इस महत्वाकांक्षी योजना पर विभाग जमकर काम करें तो बच्चों में गुणवत्ता शिक्षा में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। वहीं शिक्षकों में भी अध्यापन के प्रति रूचि बढ़ेगी। लेकिन विभाग ने इसे काफी हल्के में लिया। शिक्षकों ने ठंड को बनाया बहाना

इस अभियान पर कई शिक्षकों ने इस अभियान पर ही अनभिज्ञता प्रकट किया है। शिक्षकों का कहना है कि इस तरह के अभियान की पूरी जानकारी विभाग द्वारा नहीं मिली है। एक एचएम ने बताया कि विभाग से पत्र तो मिला है लेकिन कैसे और किस तरह करना है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। विभाग पहले कायदे से इस अभियान के बारे में बताए। एक शिक्षक ने बताया कि विभाग ने पूरा मैटेरियल अंग्रेजी में दिया है। इस कारण भी समझने में दिक्कतें आ रही है।

अंग्रेजी में मैटेरियल होने के कारण शिक्षक समझ नहीं पा रहे हैं। एक से दो दिनों के अंदर जूम पर इस बाबत मीटिग किया जाएगा।

रासीद नवाज

डीपीओ, सर्व शिक्षा अभियान, मधेपुरा

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