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महीने का 40 लाख राजस्व, फिर भी जान जोखिम में! मुरलीगंज रेलवे स्टेशन पर शुरू नहीं हुआ हाई लेवल प्लेटफॉर्म का काम

Published: Sat, 05 Sep 2026 11:05 AM (GMT+05:30)

Murliganj Railway Station: मुरलीगंज रेलवे स्टेशन पर 2 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत हाई लेवल प्लेटफॉर्म का निर्माण कार्य ...और पढ़ें

Murliganj Railway Station: 2 करोड़ का टेंडर निकलने के बाद भी कागजों में अटका हाई लेवल प्लेटफॉर्म का निर्माण, छोटी लाइन के चबूतरे से सफर करने को मजबूर यात्री

Murliganj Railway Station: 2 करोड़ का टेंडर निकलने के बाद भी कागजों में अटका हाई लेवल प्लेटफॉर्म का निर्माण, छोटी लाइन के चबूतरे से सफर करने को मजबूर यात्री

HighLights

  1. मुरलीगंज स्टेशन पर हाई लेवल प्लेटफॉर्म निर्माण में देरी।

  2. नीचे प्लेटफॉर्म से 30 से अधिक यात्री दुर्घटनाग्रस्त।

  3. मासिक 40 लाख राजस्व के बावजूद सुविधाओं का अभाव।

संवाद सूत्र, मुरलीगंज (मधेपुरा)। Murliganj Railway Station:  पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर रेल मंडल अंतर्गत व्यस्त सहरसा-पूर्णिया रेलखंड पर स्थित मुरलीगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर विभागीय उदासीनता का आलम यह है कि करीब दो करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत हाई लेवल प्लेटफॉर्म का निर्माण कार्य महीनों बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकल सका है।

रेलवे प्रशासन द्वारा प्लेटफॉर्म संख्या एक को ऊंचा (हाई लेवल) करने के लिए टेंडर प्रक्रिया तो निकाल दी गई, लेकिन धरातल पर अब तक एक ईंट भी नहीं रखी जा सकी है। कागजी प्रक्रियाओं में अटकी इस योजना का खामियाजा प्रतिदिन हजारों यात्रियों को अपनी जान हथेली पर रखकर भुगतना पड़ रहा है।

विडंबना यह है कि मुरलीगंज स्टेशन पर आज भी छोटी लाइन (मीटरगेज) के जमाने वाले नीचे प्लेटफॉर्म से ही ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। ब्रॉडगेज की बोगियों का पायदान प्लेटफॉर्म से काफी ऊपर होने के कारण ट्रेन में चढ़ने और उतरने के दौरान यात्रियों को भारी छलांग लगानी पड़ती है।

फिर भी बुनियादी सुविधाओं को तरसते मुसाफिर

स्थानीय लोगों और दैनिक यात्रियों के अनुसार, प्लेटफॉर्म की कम ऊंचाई के कारण ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी में अब तक 30 से अधिक यात्री फिसलकर पटरियों के बीच गिर चुके हैं। इन हादसों में कई यात्रियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग हमेशा के लिए दिव्यांग हो गए। हालांकि, विभाग द्वारा प्लेटफॉर्म ऊंचीकरण की कागजी पहल शुरू होने से लोगों में उम्मीद जगी थी, लेकिन जमीनी कार्य शुरू न होने से आक्रोश बढ़ रहा है।

40 लाख का मासिक राजस्व

मुरलीगंज रेलवे स्टेशन की स्थापना करीब सात दशक पूर्व हुई थी। आज यह स्टेशन टिकट बिक्री और माल ढुलाई से रेलवे को प्रतिमाह 40 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्रदान करता है। इसके बावजूद यहां मुसाफिरों को बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं।

  • समस्तीपुर रेल मंडल अंतर्गत सहरसा-पूर्णिया रेलखंड के मुरलीगंज स्टेशन पर ₹2 करोड़ की लागत से प्लेटफॉर्म-1 का होना है ऊंचीकरण

  • टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद धरातल पर काम शुरू नहीं, 2014 से छोटी लाइन वाले पुराने प्लेटफॉर्म से ही दौड़ रहीं ब्रॉडगेज ट्रेनें

  • नीचे प्लेटफॉर्म के कारण बोगी में चढ़ने-उतरने के दौरान अब तक 30 से अधिक यात्री हो चुके हैं दुर्घटनाग्रस्त; कई गंवा चुके हैं जान

  • मासिक 40 लाख से अधिक की आय देने वाले स्टेशन पर शुद्ध पेयजल, सुव्यवस्थित शौचालय, प्रतीक्षालय और शेड का घोर अभाव

स्टेशन पर यात्रियों के लिए शुद्ध पेयजल का भारी संकट है। लगाया गया छोटा आरओ सिस्टम अक्सर तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़ा रहता है, जिसके कारण यात्रियों और स्थानीय रेलकर्मियों को बाजार से बोतलबंद पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ती है। वहीं, सार्वजनिक प्रसाधन की व्यवस्था भी बदहाल है। पूरे स्टेशन परिसर में महज एक शौचालय होने और उसकी नियमित सफाई न होने से दुर्गंध फैली रहती है, जिससे महिला यात्रियों, युवतियों और बच्चों को भारी असहजता झेलनी पड़ती है।

शेड और प्रतीक्षालय की कमी, खुले आसमान तले इंतजार की लाचारी

मुरलीगंज स्टेशन से राजधानी पटना को जोड़ने वाली जनहित एक्सप्रेस के अलावा कोशी एक्सप्रेस, हाटे बाजारे एक्सप्रेस, जनसेवा एक्सप्रेस, आनंद विहार स्पेशल और कई जोड़ी पैसेंजर (डेमू) ट्रेनों का नियमित ठहराव होता है।

महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव और हजारों की दैनिक फुटफॉल के बावजूद स्टेशन पर बैठने के लिए न तो पर्याप्त प्रतीक्षालय (वेटिंग हॉल) हैं और न ही प्लेटफॉर्म पर मुकम्मल शेड की व्यवस्था है। भीषण गर्मी, मूसलाधार बारिश और कड़ाके की ठंड के दिनों में मुसाफिरों को खुले आसमान के नीचे खड़े होकर ट्रेनों की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

कुसहा त्रासदी के बाद जल्दबाजी में शुरू की गई थी सेवा

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो वर्ष 2008 की प्रलयंकारी कुसहा त्रासदी के बाद मुरलीगंज और आसपास का समूचा कोसी-सीमांचल इलाका वर्षों तक सीधी रेल कनेक्टिविटी से कटा रहा था। वर्ष 2014 में जब बड़ी लाइन का अमान परिवर्तन कार्य पूरा हुआ, तो राजनीतिक दबाव और जनआक्रोश के बीच जल्दबाजी में मीटरगेज वाले पुराने प्लेटफॉर्म की ही लीपापोती व मरम्मत कर ब्रॉडगेज ट्रेनों का परिचालन हरी झंडी दिखाकर शुरू कर दिया गया। तब से लेकर आज तक एक दशक बीत जाने के बावजूद प्लेटफॉर्म को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप ऊंचा नहीं किया गया।

व्यवसायियों व संघर्ष समिति ने जल्द निर्माण की उठाई मांग

प्लेटफॉर्म ऊंचीकरण के टेंडर के बाद अब स्थानीय रेल संघर्ष समिति, चैंबर ऑफ कॉमर्स और बुद्धिजीवियों ने रेल प्रशासन से अविलंब निर्माण कार्य शुरू कराने की पुरजोर मांग की है।

स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि मुरलीगंज एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है। यदि समय रहते दो करोड़ की स्वीकृत योजना से हाई लेवल प्लेटफॉर्म का निर्माण, दोनों छोरों पर शेड का विस्तार और पेयजल-शौचालय की व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाए, तो यह स्टेशन लाखों लोगों के लिए सुरक्षित और सुगम यात्रा का मजबूत केंद्र बन जाएगा।