मधेपुरा : जलवायु परिवर्तन के परिपेक्ष्य में टिकाऊ खेती विषय पर किसान संगोष्ठी सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन मुरलीगंज प्रखंड के चामगढ़ में आयोजित की गई। संगोष्ठी कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ. मिथलेश कुमार राय ने किया। संगोष्ठी के दौरान समेकित कृषि प्रणाली से किसानों से अवगत कराया गया। कृषि क्षेत्र मे जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न होने वाली समस्या पर विस्तार से चर्चा की गई। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब गंभीर समस्या बनी हुई है। इस पर किसी का नियंत्रण नहीं है। किसानों को अब जलवायु के अनुसार खेती का चयन करना होगा। तभी प्रकृति के मार से बचा जा सकता है। समय बदल रहा है इसके लिए अपने आप में बदलाव लाना होगा। तभी हम इससे बच सकते है।

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फसलों को कीट से बचाने की दी गई सलाह : संगोष्ठी के दौरान कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि आम तौर पर फसलों में कीड़े मकोड़े के प्रकोप बढ़ने से भी किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों में कीट का प्रकोप बढ़ता है। इसके लिए वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए सलाह को मानने से ही इसे रोका जा सकता है। इसके लिए अच्छे कंपनी के कीट निरोधी दवा का प्रयोग कृषि वैज्ञानिकों के सलाह अनुसार करें।

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पशुपालन कर किसान हो सकते है समृद्ध : वैज्ञानिकों ने कृषि गोष्ठी के दौरान किसानों को पशुपालन करने पर विशेष जोर देने की बात कही। वैज्ञानिकों ने कहा कि पशुपालन से डेयरी का उद्योग कर किसान समृद्ध हो सकते है। इससे किसानों को कई स्तर पर फायदा हो सकता है। पशु के गोबर खेतों में डालने से आप अच्छी उपज प्राप्त कर सकते है। इससे खेतों में खाद की भी बचत होती है। मौके पर कृषि वैज्ञानिक ड़ॉ आरपी शर्मा, सुनिल कुमार ¨सह, विकास कुमार, रूबी कुमारी, किसान सुरेश यादव,मु.आलम,रवि कुमार,रामदेव यादव,फागु यादव, सत्येंद्र यादव,महेश साह,रामचंद्र यादव,र¨वद्र कुमार,विष्णुदेव यादव,रामदेव यादव,मुकेश कुमार, नवीन यादव, सहित अन्य मौजूद थे।

By Jagran