19 साल से भवन का इंतजार, मधेपुरा में टीन शेड के नीचे 200 बच्चों की पढ़ाई, चंदे से बना स्कूल; विभाग बेखबर
Madhepura Primary School Tin Shed Building Construction Delays: मधेपुरा के मुरलीगंज प्रखंड में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय भतखोरा पश्चिमी टोला 19 ...और पढ़ें

मुरलीगंज के भतखोरा स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय जहाँ टीन के जर्जर शेड में खौफ के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं मासूम बच्चे।
HighLights
मधेपुरा के स्कूल को 19 साल से भवन का इंतजार।
200 बच्चे जर्जर टीन शेड में जान जोखिम में डालकर पढ़ते हैं।
जमीन मिलने के 9 साल बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं।
संवाद सूत्र, मुरलीगंज (मधेपुरा)। Madhepura Primary School Tin Shed Building Construction Delays: बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सर्व शिक्षा अभियान के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत काफी चौंकाने वाली है। मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत भतखोड़ा पंचायत स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय 'भतखोरा पश्चिमी टोला' पिछले 19 वर्षों से अपने भवन का इंतजार कर रहा है।
स्कूल का संचालन बांस-बल्ले और टीन के जर्जर शेड में हो रहा है, जहां 200 से अधिक मासूम बच्चे हर दिन डर के साए में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। आंधी-तूफान, बरसात हो या कड़ाके की ठंड अथवा चिलचिलाती धूप, बच्चे और शिक्षक हर मौसम में जान हथेली पर रखकर पठन-पाठन करते हैं।
वर्ष 2007 में स्थापित इस विद्यालय को आज तक पक्का भवन नसीब नहीं हो सका। शुरुआत में यह स्कूल स्थानीय ग्रामीण वंदेलाल मंडल के दरवाजे पर चलता रहा। इसके बाद वर्ष 2016 में ग्रामीणों की पहल पर दानदाता भूषण मंडल ने विद्यालय भवन निर्माण के लिए अपनी 20 डिसमिल जमीन बाकायदा राज्यपाल के नाम रजिस्ट्री कर दान दे दी।
ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब नौनिहालों को पक्की छत मिलेगी, लेकिन जमीन मिलने के 9 साल बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय भतखोरा पश्चिमी टोला 19 वर्षों (2007) से अपना भवन बनने की बाट जोह रहा
वर्ष 2016 में दानदाता भूषण मंडल ने 20 डिसमिल जमीन राज्यपाल के नाम रजिस्ट्री की, लेकिन 9 साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ
विद्यालय में नामांकित 200 से अधिक बच्चे और 8 शिक्षक-कर्मचारी जर्जर टीन शेड व फूस के ढाँचे में जान जोखिम में डालकर कर रहे पढ़ाई
तेज आंधी में अस्थायी ढांचा उजड़ने पर ग्रामीणों व शिक्षकों ने चंदा कर दोबारा बनवाया टीन शेड; एचएम ने जताई अनहोनी की आशंका
200 बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़, आंधी में उड़ी छत तो चंदा कर शुरू हुई पढ़ाई
वर्तमान में विद्यालय में 200 से अधिक छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए एक प्रधानाध्यापक, तीन शिक्षक और चार शिक्षिकाओं समेत कुल आठ शिक्षाकर्मी तैनात हैं। पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद बुनियादी ढांचे (भवन) के अभाव में शिक्षा की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
हाल ही में आई तेज आंधी में स्कूल का अस्थायी ढांचा और टीन की छत पूरी तरह उजड़ गई थी। सरकारी मदद न मिलने पर शिक्षकों और ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर दोबारा टीन शेड खड़ा किया, तब जाकर जैसे-तैसे पढ़ाई शुरू हो सकी। बारिश के दिनों में टीन से पानी टपकने और छत उड़ने का खतरा लगातार बना रहता है।
विभाग बेखबर, उठ रहे गंभीर सवाल; एचएम ने जाहिर किया दर्द
जमीन उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होना शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाई गई, लेकिन सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले।
भवन निर्माण के लिए प्रखंड से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से पत्र भेजा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब या जानकारी नहीं मिली। टीन के शेड में स्कूल चलाना बेहद जोखिम भरा काम है। आंधी और बारिश में हमेशा किसी बड़े हादसे या अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
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