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मधेपुरा में केस दबाकर बैठे 14 दारोगाओं पर FIR! हत्या व शराब के 21 मामलों का नहीं सौंपा था चार्ज, कोसी रेंज में हड़कंप

Published: Fri, 11 Sep 2026 09:44 PM (IST)

Madhepura Police FIR on 14 SI ASI: मधेपुरा में 14 पुलिस पदाधिकारियों पर आपराधिक मामलों के अनुसंधान में घोर लापरवाही ...और पढ़ें

Madhepura Police FIR on 14 SI ASI: मधेपुरा में 21 केस दबाए रखने वाले 14 दारोगाओं पर FIR, तबादले के बाद भी नहीं सौंपा था चार्ज

Madhepura Police FIR on 14 SI ASI: मधेपुरा में 21 केस दबाए रखने वाले 14 दारोगाओं पर FIR, तबादले के बाद भी नहीं सौंपा था चार्ज

HighLights

  1. मधेपुरा में 14 पुलिस पदाधिकारियों पर FIR दर्ज हुई।

  2. 21 संवेदनशील मामलों की जांच में लापरवाही का आरोप।

  3. केस डायरी दबाने और प्रभार न सौंपने पर कार्रवाई।

जागरण संवाददाता, मधेपुरा। Madhepura Police FIR on 14 SI ASI: आपराधिक मामलों के अनुसंधान में घोर लापरवाही बरतने, जांच पूरी न करने और तबादले के बावजूद केस डायरी दबाकर बैठे रहने वाले पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ मधेपुरा में बड़ा प्रशासनिक चाबुक चला है।

सिंहेश्वर थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने वर्ष 2015 से 2024 के बीच के कुल 21 संवेदनशील मुकदमों को बेवजह दबाकर लंबित रखने के गंभीर आरोप में 14 सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस कार्रवाई के बाद से पुलिस महकमे में भारी हड़कंप मच गया है।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में अग्रसारित प्रतिवेदन में थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विभागीय समीक्षा और भौतिक सत्यापन के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि हत्या, जानलेवा हमला, मद्य निषेध (शराबबंदी कानून) और विद्युत अधिनियम जैसे गंभीर व संवेदनशील मामलों को इन जांच अधिकारियों ने वर्षों से अटका रखा था।

स्थानांतरण होने के बाद बार-बार विभागीय ताकीद और पत्राचार किए जाने के बावजूद संबंधित अनुसंधानकर्ताओं (आईओ) ने न तो केस का प्रभार किसी अन्य पदाधिकारी को सौंपा और न ही मुकदमों के अंतिम निष्पादन में कोई रुचि दिखाई। अब इन सभी 21 लंबित मुकदमों के नए सिरे से अनुसंधान और निष्पादन का दायित्व एसआई रौशन कुमार को सौंप दिया गया है।

सर्किल इंस्पेक्टर व थानेदार सहित 14 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

दर्ज कराई गई नामजद प्राथमिकी में शामिल 14 पुलिस पदाधिकारियों में से कई वर्तमान में दूसरे जिलों के महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थापित हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं। नामजद आरोपियों में दरभंगा के वर्तमान सर्किल इंस्पेक्टर एसआई रामेश्वर साफी, सहरसा जिले के पस्तपार के थानाध्यक्ष एसआई विजय पासवान, पटना पुलिस लाइन में तैनात एएसआई रणवीर कुमार और अररिया में पदस्थापित एसआई राजेश कुमार सिंह के नाम शामिल हैं।

  • सिंहेश्वर थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने 2015 से 2024 के बीच 21 मामलों को लंबित रखने व प्रभार न सौंपने पर 14 एसआई-एएसआई पर कराई नामजद FIR

  • हत्या, मारपीट, मद्य निषेध और विद्युत अधिनियम जैसे संवेदनशील मुकदमों को बिना निष्पादन वर्षों तक दबाए रखने का विभागीय समीक्षा में हुआ खुलासा

  • दर्ज प्राथमिकी में दरभंगा के सर्किल इंस्पेक्टर, पस्तपार (सहरसा) थानाध्यक्ष और पटना व अररिया में तैनात पुलिस पदाधिकारी भी शामिल

  • सभी 21 मामलों के अनुसंधान का जिम्मा एसआई रौशन कुमार को सौंपा गया; डीजीपी के कड़े रुख के बाद कोसी रेंज में लापरवाह आईओ पर लगातार शिकंजा

इसके अलावा एसआई रणवीर कुमार राजत, एसआई शंभू कुमार, एसआई मदन चौधरी, एसआई मनोज राम तथा एएसआई संवर्ग के कृष्ण कुमार सिंह, सुबोध रजक, रामनिवास चौधरी, विनोद कुमार, अनिल कुमार और अमरेंद्र कुमार सिन्हा को भी केस डायरी दबाए रखने का दोषी पाते हुए प्राथमिकी में नामजद अभियुक्त बनाया गया है।

क्राइम मीटिंग के बाद एसपी का कड़ा रुख, कोसी रेंज में हड़कंप

मामले की पुष्टि करते हुए मधेपुरा के एसडीपीओ अजय कुमार ने बताया कि जिला पुलिस कप्तान (एसपी) संदीप सिंह द्वारा मासिक क्राइम मीटिंग में वर्षों से लंबित मामलों की गहन समीक्षा की गई थी, जिसमें यह लापरवाही उजागर हुई। एसपी के कड़े निर्देश के बाद यह विधि-सम्मत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।

वहीं, कोसी रेंज के डीआईजी कुमार आशीष ने दो-टूक कहा कि आम जनता को समय पर न्याय दिलाना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुराने और गंभीर मामलों के त्वरित अनुसंधान को लेकर मुख्यालय स्तर से लगातार स्पष्ट निर्देश दिए जा रहे हैं, ऐसे में जांच में शिथिलता या केस दबाकर रखने की लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

फरवरी 2025 में 31 दारोगाओं पर दर्ज हुआ था केस, डीजीपी सख्त

उल्लेखनीय है कि राज्य पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार मुकदमों के अनुसंधान में हीलाहवाली, टालमटोल और केस डायरी अटकाने वाले अनुसंधानकर्ताओं के खिलाफ शुरुआत से ही बेहद सख्त रुख अपनाए हुए हैं। डीजीपी के कड़े आदेशों के अनुपालन में मधेपुरा एसपी संदीप सिंह ने लंबित मामलों को लेकर विशेष अभियान छेड़ रखा है।

इससे पूर्व फरवरी 2025 में भी मधेपुरा सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार ने इसी तरह केस पेंडिंग रखने के आरोप में एक साथ 31 दारोगाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। अब सिंहेश्वर थाने में 14 पुलिस पदाधिकारियों पर मुकदमा होने से लापरवाह जांच अधिकारियों में अफरातफरी का माहौल है।