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बाढ़ का पानी उतरा, संकट नहीं! मधेपुरा के चौसा में महिलाओं को बांस के जुगाड़ शौचालय का सहारा, खतरा बरकरार

Published: Thu, 08 Oct 2026 06:27 AM (IST)

मधेपुरा के चौसा में बाढ़ का पानी घटने के बावजूद ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के लिए स्वच्छ पेयजल और शौचालय का ...और पढ़ें

मधेपुरा के चौसा में कोसी नदी के जलजमाव के बीच बांस और चचरी के सहारे बनाया गया जुगाड़ का अस्थाई शौचालय

मधेपुरा के चौसा में कोसी नदी के जलजमाव के बीच बांस और चचरी के सहारे बनाया गया जुगाड़ का अस्थाई शौचालय

HighLights

  1. बाढ़ का पानी घटने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव।

  2. महिलाएं बांस के अस्थायी शौचालयों का उपयोग करने को मजबूर।

  3. लोक-लज्जा, सुरक्षा और महामारी फैलने का दोहरा खतरा।

मनीष अकेला, चौसा (मधेपुरा)। कोसी नदी के मुहाने पर बसे मधेपुरा जिले के आलमनगर और चौसा प्रखंड की 10 पंचायतों के ग्रामीणों के लिए बाढ़ का पानी घटने के बाद भी मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।

करीब एक महीने तक चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिरी विशाल आबादी अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। यद्यपि बाढ़ का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन स्वच्छ पेयजल और सबसे बढ़कर शौचालय को लेकर गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो गया है।

  • मधेपुरा जिले के चौसा और आलमनगर प्रखंड की 10 पंचायतें दोबारा बाढ़ के पानी से घिरीं, जलजमाव से जनजीवन अस्त-व्यस्त

  • पक्के शौचालय पानी में डूबने से ग्रामीण नदी और धार किनारे बांस के 'चचला जुगाड़' से अस्थाई शौचालय बनाकर उपयोग करने को मजबूर

  • महिलाओं को अंधेरे में पैर फिसलने, डूबने और सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का डर; कई किमी पैदल जाने की लाचारी

  • चौसा अंचलाधिकारी उदयकांत मिश्र ने फुलौत पूर्वी, पश्चिमी, चिरौरी व मोरसंडा को बाढ़ प्रभावित घोषित कर राहत कार्य का दिया भरोसा

घरों में बने पक्के शौचालय पूरी तरह पानी में डूबे होने के कारण ग्रामीण नदी और धार के किनारे बांस के जुगाड़ से 'चचला' (अस्थाई ढांचा) बनाकर किसी तरह शौच के लिए उपयोग कर रहे हैं। पानी से घिरे इन कमजोर बांस के ढांचों पर हर पल अनहोनी और हादसे का खतरा मंडराता रहता है।

महिलाओं के सामने लोक-लज्जा व सुरक्षा का दोहरा संकट, 2 किमी पैदल चलने की मजबूरी

बाढ़ के इस भीषण संकट में सबसे ज्यादा दुश्वारियां महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ रही हैं। बाढ़ पीड़ित रुकमणी देवी, सीता देवी, पार्वती देवी और सोनम देवी बताती हैं कि दिन के उजाले में खुले में बांस के बने चचला शौचालय का उपयोग करना लोक-लज्जा के कारण मुमकिन नहीं होता।

वहीं, रात के अंधेरे में कमजोर बांस से पैर फिसलकर उफनती धार में गिरने और जहरीले सांप-बिच्छू के डंक मारने का डर हमेशा बना रहता है। जब जलजमाव ज्यादा बढ़ जाता है, तो शौच के लिए 2 किलोमीटर तक पैदल चलकर ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ता है। नदी किनारे इस तरह के अस्थाई इंतजामों से महिलाओं की सुरक्षा और गांव में महामारी फैलने का खतरा दोनों बढ़ गए हैं।

चार पंचायतें बाढ़ प्रभावित घोषित, प्रशासन की ओर से राहत व सहायता की कवायद

इस संबंध में चौसा के अंचलाधिकारी (सीओ) उदयकांत मिश्र ने बताया कि प्रखंड की चार पंचायतों—फुलौत पूर्वी, फुलौत पश्चिमी, चिरौरी और मोरसंडा को अधिकारिक रूप से बाढ़ प्रभावित घोषित किया गया है।

उन्होंने आश्वस्त किया कि अंचल प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों को खाद्य सामग्री, स्वास्थ्य सुविधाएं और पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ राहत कार्य चलाए जा रहे हैं। पानी पूरी तरह निकलने के बाद स्थिति को सामान्य करने और स्वच्छता बहाल करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं।

"चौसा प्रखंड की चार पंचायतों—फुलौत पूर्वी, फुलौत पश्चिमी, चिरौरी और मोरसंडा को बाढ़ प्रभावित घोषित किया गया है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।"

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— उदयकांत मिश्र, अंचलाधिकारी (सीओ), चौसा (मधेपुरा)