करवा चौथ 2026 : शाम 5:38 से 6:56 तक पूजा का शुभ मुहूर्त, रात 8:15 बजे दिखेगा चांद, मां गौरी व गणेश जी की आराधना
करवा चौथ 2026: करवा चौथ का पावन पर्व आज श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, जिसमें सुहागिनें ...और पढ़ें

करवा चौथ 2026: मधेपुरा में सामान की खरीदारी हो रही है।
HighLights
करवा चौथ का पावन पर्व आज श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है।
पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 से 6:56 बजे तक।
चंद्रमा का दर्शन रात 8:15 बजे के बाद होगा।
संवाद सूत्र, पुरैनी (मधेपुरा)। करवा चौथ 2026: पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, अखंड सौभाग्य और सुखमय दांपत्य जीवन की मंगलकामना का पावन लोकपर्व करवा चौथ आज गुरुवार को श्रद्धा, निष्ठा और उमंग के साथ मनाया जा रहा है।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाए जाने वाले इस निर्जला व्रत को लेकर सुहागिन महिलाओं में खासा उत्साह है। घर-परिवार में पर्व को लेकर सुबह से ही विशेष तैयारियां की जा रही हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सुहागिनें पूरे दिन निराहार व निर्जला रहकर शिव परिवार की आराधना करती हैं।
पूजा के दौरान भगवान गणेश और कार्तिकेय जी को पीले पुष्पों की माला, मोदक (लड्डू), केला व ऋतुफल अर्पित किए जाते हैं। इसके उपरांत देवाधिदेव महादेव और मां पार्वती को बेलपत्र, चंदन तथा सुहाग का संपूर्ण शृंगार अर्पित किया जाता है। पूजा स्थल पर शुद्ध घी का दीपक और सुगंधित अगरबत्ती प्रज्वलित कर महिलाएं व्रत कथा का श्रवण करती हैं।
1 घंटा 18 मिनट का शुभ मुहूर्त, 8:15 बजे दिखेगा चांद
गणेशपुर निवासी प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित दिनकर झा ने बताया कि इस वर्ष करवा चौथ का व्रत अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला विशेष संयोग लेकर आया है। पंचांगीय गणना के अनुसार, चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर की मध्यरात्रि के उपरांत 01:06 बजे से शुरू हो चुकी है, जो 29 अक्टूबर गुरुवार की रात 10:09 बजे तक रहेगी।
करवा चौथ: पूजा मुहूर्त व चंद्रोदय समय सारणी
पर्व तिथि: गुरुवार (कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी)
चतुर्थी तिथि आरंभ: 28 अक्टूबर मध्यरात्रि बाद 01:06 बजे
चतुर्थी तिथि समापन: 29 अक्टूबर गुरुवार रात 10:09 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:38 बजे से शाम 06:56 बजे तक
कुल पूजा अवधि: 01 घंटा 18 मिनट
संभावित चंद्रोदय समय: रात 08:15 बजे से 08:17 बजे के बीच
पूजन देव: मां गौरी, भगवान शिव, श्रीगणेश एवं कार्तिकेय जी
अर्घ्य सामग्री: कच्चा दूध, गंगाजल, सादा जल और गुलाब जल
आचार्य के अनुसार, शाम को पूजा का सबसे उत्तम व शुभ मुहूर्त 5:38 बजे से लेकर 6:56 बजे तक रहेगा। यानी व्रतियों को पूजा-अर्चना के लिए कुल 01 घंटा 18 मिनट का प्रशस्त समय मिलेगा। वहीं, रात्रि में चंद्रमा का उदय लगभग 8:15 से 8:17 बजे के मध्य होगा। चंद्र दर्शन के उपरांत ही अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा। उन्होंने व्रतियों को पूजा के दौरान श्रीगणेश उपासना के साथ गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करने का परामर्श दिया है।
पूजा थाली और अर्घ्य की विधि
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, पूजा की थाली में एक दीपक, सिंदूर, अक्षत (अटूट चावल), कुमकुम, रोली, पुष्प, दूर्वा और चावल से निर्मित अथवा सफेद मिठाई अवश्य रखें। टोंटीदार मिट्टी या तांबे के करवे में शुद्ध जल भरकर मां गौरी, गणेश और कार्तिकेय की प्रतिष्ठा कर कथा सुनें।
रात्रि में चंद्रमा के क्षितिज पर आते ही चलनी अथवा जलपात्र की छाया में चंद्र दर्शन करें। इसके बाद छलनी से पति का दीदार कर उनके हाथों से जल ग्रहण करें। चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल में थोड़ा कच्चा दूध और गुलाब जल मिलाना अत्यंत शुभकारी माना गया है। अंत में परिवार के बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और पति को भोजन कराकर स्वयं अन्न-जल ग्रहण करें।
पूर्व संध्या पर सजे रहे बाजार, देर शाम तक उमड़ी भीड़
करवा चौथ को लेकर प्रखंड मुख्यालय पुरैनी सहित ग्रामीण बाजारों में बुधवार की सुबह से लेकर देर शाम तक रौनक बनी रही। मुख्य चौक-चौराहों पर पूजन सामग्री, फल, मिठाई, वस्त्र, फैंसी चूड़ियां, बिंदी, मेंहदी और शृंगार के सामान की दुकानों पर महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई।
सुहागिनों ने पूजन के लिए कलश, टोंटीदार मिट्टी के करवे, चलनी, दीये, करवा चौथ व्रत कथा की पुस्तिकाएं और शृंगार का सामान खरीदा। इसके अलावा आभूषण व कपड़ों के प्रतिष्ठानों पर भी खरीदारी का जोर रहा। बाजारों में लौटी इस रौनक और बंपर बिक्री से स्थानीय व्यापारियों व दुकानदारों के चेहरे खिले रहे।
