मधेपुरा। जिले में बार-बार अवैध कफ सिरप की बड़ी-बड़ी खेप पकड़ी जा रही है। नशे के आदि लोगों ने शराब की जगह कफ सीरप का इस्तेमाल करना प्रारंभ कर दिया है। शराबबंदी के बाद कफ सिरप का अवैध कारोबार खूब फलफूल रहा है। इसमे कई सफेदपोश व्यक्ति शामिल है। बाकायदा इसका एक सिडिकेट तैयार कर लिया गया है। कफ सीरप के अवैध कारोबार का यह धंधा गांव-गांव तक पहुंच गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि युवा व किशोर पीढ़ी इसकी चपेट में आ रही है। इधर मधेपुरा सदर थाना क्षेत्र में सोमवार को पुलिस ने 10 हजार पीस कोडीन युक्त अवैध कफ सिरप बरामद किया है। इससे पहले सिंहेश्वर थाना क्षेत्र के रामपट्टी गांव में 282 कार्टून की बड़ी खेप पकड़ाई थी। वही बीच बीच मे और भी कई खेप पकड़ाई है, लेकिन अब तक पुलिस इसके गहराई में जाकर सरगना तक नही पहुंच पाई है। गुरुवार को एसपी ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात को स्वीकार किया कि इसमे एक बड़ा सिडिकेट काम रहा है। आखिर नकेल कसने में पुलिस नाकाम क्यों बड़ा सवाल यह है कि पुलिस अब तक कफ सिरप के अवैध कारोबार पर पूरी तरह नकेल क्यों नहीं कस पाई है। आखिर कफ सिरप की बरामदगी के बाद इसके सरगना तक पहुंचने की कोशिश क्यों नही की जा रही है। पुलिस को इस मामले की हर कड़ी को जोड़नी पड़ेगी। एसपी स्वयं इस मामले में दिलचस्पी लेकर आवश्यक निर्देश तो दे रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। पुलिस खुद भी मान रही है कि इस धंधे में कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है। बार-बार पुलिस ऑटो ड्राइवर या ट्रक ड्राइवर जैसी छोटी मछली को ही पकड़ पा रही है। बड़ी मछली हर बार पुलिस की जाल से बाहर निकल जा रही है।

पूरे जिले में लंबे समय से कफ सीरप का धंधा बेरोक टोक जारी था। सिंहेश्वर के रामपट्टी में कुछ माह पहले पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में कफ सीरप की खेप पकड़ाई थी। सिंहेश्वर एक बड़ा अड्डा बन चुका है। यही नहीं जिला मुख्यालय के गली गली व चाय नाश्ते की दुकानों से यह धंधा बेरोकटोक चल रहा है। कई अपराध की वजह भी इसे बताया गया है। कम उम्र के लड़के इसका सेवन कर अपराध को भी अंजाम दे रहे है। वहीं सिंहेश्वर में मेला कैंपस, कई चाय दुकान, मवेशी हाट, मंदिर के आसपास के एरिया व इसी वर्ष बने मुक्तिधाम में इस कारोबार से जुड़े लोग अंजाम देता है। पुलिसिया खौफ नहीं रहने के कारण इन जगहों पर सेवन करने वाले पहुंचता था फोन पर उन्हें कफ सीरप की डिलीवरी हो जाती थी।

जिले में शराबबंदी के बाद प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप का अवैध कारोबार खूब फल फूल रहा है। जिले में गली-गली में कफ सिरफ के कारोबारियों ने अपने पांव जमा लिए। अक्सर खाली जगहों पर सैकड़ों की संख्या में कफ सिरप की खाली बोतलें मिलते रही है। पुलिस भी इस बात से अंजान नही थी। कहीं न कहीं इस धंधे को संरक्षण मिल रहा था।

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