संवाद सूत्र, सिंहेश्वर (मधेपुरा) : स्वतंत्रता सेनानी कार्तिक बाबू के पौत्र विजय कुमार सिंह लोगों को सामाजिक व धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिलाने के लिए सदैव संघर्षरत रहे हैं। मूल रूप से जिले के सिंहेश्वर प्रखंड स्थित लालपुर सरोपट्टी के विजय सिंह के पिता देवेंद्र नारायण सिंह सिचाई विभाग में सहायक अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वह अपने दादाजी (स्वतंत्रता सेनानी) के नक्शे कदम पर सामाजिक व धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार की दिशा में चलाई गई मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। आजादी की लड़ाई के साथ धार्मिक व सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाले उनके दादा ने सुप्रसिद्ध सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति (ट्रस्ट) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने ट्रस्ट गठन के लिए वाद भागलपुर जिला न्यायालय में दायर करवाया था। इसमें लंबी लड़ाई के बाद न्यायालय न्यायादेश से ट्रस्ट का गठन किया गया। यहीं नहीं विजय कुमार सिंह अब तक तीन-तीन बार सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति के सदस्य पद को सुशोभित कर चुके हैं। वह वर्तमान सदस्य भी हैं। इसके अलावा सरस्वती शिशु मंदिर के अध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा वर्ष 2005 में विजय कुमार सिंह ने सामाजिक पहल कर सिंहेश्वर में करोड़ों रुपये की लागत से प्रतिमा सिंह धर्मशाला निर्माण की नींव रखी। इनके सार्थक प्रयास से एनआरआइ ने करोड़ों की लागत से धर्मशाला का निर्माण कराया और न्यास समिति को हैंड ओवर कर दिया। आज लाखों लोग शादी, विवाह या अन्य विशेष अवसर पर उस धर्मशाला का सशुल्क उपभोग कर रहे हैं। वहीं वर्तमान में न्यास समिति को एमएलसी ललन सर्राफ के फंड से एक और धर्मशाला का सौगात मिला है। विजय कुमार सिंह न्यास समिति के सदस्य रहते समाज हित में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। इसके लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा। विजय कुमार सिंह की पत्नी माधवी सिंह सिंहेश्वर प्रखंड की पूर्व प्रमुख रह चुकी हैं। उनके कार्यकाल के दौरान प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में विजय कुमार सिंह ने विकास की इमारत खड़ा कर दी। इसमें मुख्य रुप से सिंहेश्वर मंदिर परिसर में भूखे नंगे रात काटने वाले कुष्ठ रोगी भिखारियों के लिए प्रमुख फंड से आशियाना बनाया। 2008 की बाढ़ में सर्व धर्म के लोगों का बने पालनहार अगस्त 2008 में आई प्रलयंकारी बाढ़ में हिदू, मुसलमान, सिख ईसाई सभी धर्मों के लाखों लोगों का आशियाना बह गया था। तब इस इलाके में विजय कुमार सिंह इनके पालनहार बने और तीन-तीन जगहों पर बाढ़ पीड़ितों के खाने पीने और रहने का व्यापक स्तर पर इंतजाम किये। वहां सभी धर्मों के लोगों का उन्होंने एक समान सेवा किया गया।

Edited By: Jagran

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