संवाद सूत्र, सिंहेश्वर (मधेपुरा) : सांस्कृतिक मूल्यों का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त है। संस्कृति ही व्यक्ति विशेष की पहचान दिलाती है। सांस्कृतिक मूल्य ही उसे विकास की ओर ले जाते हैं। सिंहेश्वर में संजीव कुमार ठाकुर उर्फ मुन्ना ठाकुर और कन्हैया ठाकुर की युवा जोड़ी सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। स्वच्छ जल के प्रति उनका लगाव गहरा है।

वे वेद पाठ के माध्यम से सनातनी संस्कृति को संरक्षित करने में जुटे हैं। भारतीय संस्कृति के मूल्यों को बहाल रखना ही इनका संकल्प रहा है। यहीं नहीं सिंहेश्वर मंदिर परिसर स्थित विशालकाय एतिहासिक शिव गंगा पोखर की स्वच्छता को लेकर वे प्रयासरत हैं। बतौर न्यास समिति के सदस्य संजीव कुमार ठाकुर व पूर्व सदस्य कन्हैया ठाकुर ने नदी और तालाब को निर्मल बनाने का जो सपना देखा था वह अब पूरा होने के कगार पर है। इनके प्रयास से न सिर्फ पोखर का कायाकल्प करने का कार्य समय-समय पर होता है बल्कि दर्शनार्थी तालाब के पानी का प्रयोग बेहिचक करते हैं। इनके अथक प्रयास से हाल के दिनों में पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने पूरी टीम के साथ मंदिर परिसर का दौरा किया था। प्रधान सचिव ने शिवगंगा के अलावा न्यास समिति के अधीन मंदिर के बगल से बहने वाली नदी के जल को निर्मल बनाने की बात कही। वहीं कहा कि पर्यटन विभाग की ओर से शिवगंगा व तालाब को स्वच्छ और सुंदर बनाने की योजना है। वे कहते हैं नदियों व जलाशयों को साफ रखकर अपनी सांस्कृतिक को जिदा रख सकते हैं।

सांस्कृतिक मूल्यों के अधिकार को बहाल रखने में हैं आगे

सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति से जुड़ कर संजीव कुमार ठाकुर उर्फ मुन्ना ठाकुर व कन्हैया ठाकुर समाज में पुरूष ही नहीं युवा व बच्चों को सांस्कृतिक मूल्यों को जीवन में उतारने की वे सीख दे रहें हैं। वे कई वर्षों से संस्कृति संरक्षण के लिए विभिन्न कार्यों को मूर्त रूप दिए हैं। मुन्ना और कन्हैया श्रीमद्भागवत गीता को पढ़ते हैं और स्वामी विवेकानंद को आदर्श मानते हैं। आध्यात्मिक परिचर्चा के माध्यम से समाज के सभी वर्गों के लोगों के बीच सांस्कृतिक व सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ नैतिक जिम्मेवारी का वहन करने की आवाज उठाते हैं। इसमें मानवीय शिक्षा को बढ़ावा देने, सामाजिक बुराइयों के विरूद्ध एक होने का संदेश देते हैं। इसके अलावा संत महात्माओं के जीवन चरित्र से सीख लेने का अलख जगाने में कामयाबी हासिल कर सांस्कृतिक मूल्यों के अधिकार को बहाल रखने में आगे हैं। वे कहते हैं कि सांस्कृतिक मूल्यों को बहाल रखने से ही प्राचीन संस्कृति को जीवित रखा जा सकता है।

Edited By: Jagran

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