संवाद सूत्र, सिंहेश्वर (मधेपुरा) : जिला मुख्यालय स्थित सुभाष चौक पर रविवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर पुष्पांजलि कर माल्यार्पण किया।

इस अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश सह मंत्री अभिषेक यादव व बीएनएमयू के सीनेट सदस्य रंजन यादव ने कहा कि भारत देश का आजादी होने में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अहम योगदान रहा। उन्होंने अपने क्रांतिकारी कार्यों के तहत भारत में आजादी के ज्वलंत नेतृत्व की भावना बनाए रखा। उनके द्वारा बनाए गए आजाद हिद फौज ने देश के विभिन्न हिस्सों को अंग्रेजी हुकूमत से मुक्त कराने का महत्वपूर्ण प्रयास किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक थे। भले ही देश की आजादी के लिए उन्होंने हिसा का मार्ग चुना था, लेकिन उनके कार्यों का भारत की आजादी में एक महत्वपूर्ण योगदान रहा। यहीं कारण है कि भारत के आजादी में उनके बहुमूल्य योगदान को देखते हुए, 23 जनवरी को उनके जन्मदिन पर सुभाष चंद्र बोस जयंती को पूरे देशभर में उत्साह और देशभक्ति संग मनाया जाता है। इस अवसर पर विवि अध्यक्ष संजीव उर्फ सोनू व सह एसएफ एस प्रमुख मनीष कुमार ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सुभाष चंद्र बोस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सुभाष चंद्र बोस ने सन 1920 से 1930 की अवधि के दौरान राष्ट्रीय कांग्रेस के स्वच्छंद भाव और ईमानदार नेता के रूप में भी कांग्रेस पार्टी में शामिल थे। सुभाष चंद्र बोस को भारत का क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी भी माना जाता है। भारत के इतिहास में स्वतंत्रता की संगत में सबसे महत्वपूर्ण योगदान सुभाष चंद्र बोस का रहा। प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सौरव कुमार व एसएफडी प्रमुख नीतीश यादव ने कहा कि अभाविप आज के दिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाती है। जिला सोशल मीडिया प्रमुख पिटू यादव व नगर सह मंत्री प्रिस कुमार ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस पूरे भारत में नेताजी के नाम से प्रसिद्ध थे। वह भारत की आजादी के लिए लगातार हिसात्मक आंदोलन लड़ते रहे। गांधी के साथ कुछ मतभेद होने की वजह से कांग्रेस में अध्यक्ष होने के बावजूद इन्होंने कांग्रेस को छोड़ दिया। उन्होंने भारत को आजाद कराने के लिए और ब्रिटिश शासन का सफाया करने के लिए आजाद हिद फौज तैयार की। उनका मानना था भारत को आजादी गांधीजी के अहिसात्मक आंदोलन से नहीं प्राप्त होने वाली। वह जर्मनी गए, वहां उन्होंने भारत के युद्ध बंधुओं अन्य नागरिकों साथ मिलकर भारतीय राष्ट्रीय सेना का निर्माण किया। इस अवसर बाबुल कुमार राहीद, आलोक कुमार आदि उपस्थित थे।

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