जागरण संवाददाता, मधेपुरा : कुमारखंड के उत्तर ग्रामीण बैंक में गुरुवार को पांच बदमाशों ने हथियार के बल पर 9.25 लाख रुपये लूट लिये। इससे पहले नवंबर 2021 में भी बदमाशों ने रौता स्थित ग्रामीण बैंक से लूटपाट की थी। 2005 में भी बैंक लूट की घटना हुई थी। इस सब से भी सबक न लेकर आज भी बैंक बिना सुरक्षा गार्ड के चल रहे हैं। लूटपाट की घटना के बाद भी बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। एसबीआइ की शहर स्थिति मुख्य शाखा को छोड़ दिया जाए तो किसी भी बैंक में मान के अनुसार गार्ड नहीं हैं। आधा दर्जन बैंक में निजी सिक्योरिटी गार्ड हैं। बाकी बैंक बिना गार्ड के चल रहे हैं।

मालूम हो कि जिले में विभिन्न बैंकों की 101 शाखाएं हैं। वहीं, विभन्न बैंकों के 436 सीएसपी का संचालन हो रहा है। सीएसपी संचालक भी कई बार बदमाशों के निशाने पर आए हैं। सिंहेश्वर के एक सीएसपी संचालक की बदमाशों ने हत्या तक कर दी थी।

जिले में 52 दिन के अंदर दूसरी बैंक लूट की घटना हुई है। गुरुवार को कुमारखंड में नौ लाख 25 हजार रुपये के लूट ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

इससे पहले कुमारखंड में ही बदमाशों ने श्रीपुर रौता उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक में लूट को अंजाम दिया था। 29 नंबर 2021 को श्रीपुर रौता बैंक में आधा दर्जन बदमाशों ने दिन में ही धाबा बोलकर 6.17 लाख रुपया लूट लिया था। यद्यपि पुलिस ने इस मामले में चार बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया था। उससे लूट के 75 हजार रुपया भी बरामद हुआ था। इससे पहले उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक रामनगर महेश शाखा में अगस्त 2005 में लूट की घटना हुई थी।

सबसे अधिक शाखा हैं उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की

जिले में उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की सबसे अधिक 34 शाखाएं है। दूसरे स्थान पर एसबीआइ के 31 शाखाएं है। ग्रामीण इलाकों के बैंक शाखा में तो निजी गार्ड भी नहीं रहते हैं। सुदूर इलाके में सीएसपी का संचालन किया जाता है। आए दिन घटनाएं होती रहती हैं। बदमाशों की नजर बैंक ग्राहकों पर भी रहती है। पिछले माह बैंक से राशि निकालकर जाने के दौरान सिंहेश्वर में लूटपाट हुई थी। इसके अलावा शहर में भी घटनाएं हो चुकी है।

बैंक : शाखा

एसबीआइ : 31

सीबीआइ :13

पीएनबी : 02

केनरा बैंक : 02

यूको बैंक : 01

बीओबी : 01

यूबीआइ : 02

बीओआइ : 04

इंडियन : 01

आइडीबीआइ : 01

आइसीआइसीआइ : 01

एक्सिस : 02

एचडीएफसी : 02

बंधन बैंक : 03

यूबीजीबी : 34

कोट सुरक्षा के दृष्टिकोण से निजी सिक्योरिटी गार्ड की व्यवस्था बैंकों में रहती है। कुछ ऐसे बैंक हैं जहां गार्ड नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस को सूचना दी जाती है। बैंकों में सीसीटीवी लगाए गए हैं। उसकी मानिटरिंग की जाती है। इसके अलावा अवकाश के दिनों में पुलिस को सूचना दी जाती है ताकि लगातार गश्ती की जा सके।

-राकेश कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक,

एसबीआइ

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