मधेपुरा। मकर संक्रांति को लेकर बाजार की रंगत निखर उठी है। गुड़ और तील की सौंधी महक बाजार में बिखर रही है। थोक से लेकर फुटकर दुकानदार तिलकुट सहित अन्य सामान बेचने में लगे हुए हैं। वहीं तिलकुट बनाने में कारीगर लगे हुए हैं। बाजार में तिलकुट की कई बेराइटी आई है। खस्ता तिलकुट, गुड़, खोवा, किशमिश सहित अन्य तिलकुट की बिक्री हो रही है। यद्यपि बाहर से भी तिलकुट मंगाया गया है। लेकिन स्थानीय तिलकुट की मांग अधिक है। दुकानदारों का कहना है कि लोग यहां बने तिलकुट ही अधिक खरीद रहे हैं। मालूम 14 जनवरी को मकर संक्रांति को लेकर तिलकुट खाने की परंपरा है। इस दिन तिलकुट खाते हैं।

कोरोना के कारण बिक्री प्रभावित इस साल कोरोना के कारण बिक्री पर असर पड़ा है। दुकानदारों का कहना है कि हर साल की अपेक्षा इस साल कम बिक्री हो रही है। वे लोग बाहर से भी तिलकुट मंगाते हैं, लेकिन अधिक मांग स्थानीय स्तर पर बनाई गई तिलकुट की ही होती है। दुकानदार रमेश कुमार बताते हैं कि बिक्री कम होने से नुकसान हो रहा है। इस बार संभावित मांग को लेकर माल तैयार किया गया है, लेकिन उस अनुपात में बिक नहीं रहा है। ऐसे में डर बना हुआ है।

तिलकुट का रेट एक नजर में

-: खस्ता तिलकुट - 300 रुपये प्रतिकिलो

-: गुड़ तिलकुट - 300 रुपये प्रतिकिलो

-: स्पेशल तिलकुट - 240 रुपये प्रतिकिलो

-: खोवा वाला तिलकुट - 700 रुपये प्रतिकिलो

-: रबड़ी वाला तिलकुट - 200 रुपये प्रतिकिलो

-: किसमिस वाला तिलकुट - 500 रुपये प्रतिकिलो

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