लखीसराय में 'हर घर नल-जल योजना' की खुली पोल: पाइप बिछे पर टंकी गायब, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग
Lakhisarai Nal Jal Yojana Pending Crisis News लखीसराय के चानन प्रखंड के गोबरदाहा कोड़ासी गांव में 'हर घर नल-जल योजना' ...और पढ़ें

Lakhisarai Nal Jal Yojana Pending Crisis : गोबरदाहा कोड़ासी में अफसरों की लापरवाही: नल-जल के बोरिंग से सिंचाई, ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर; हड़कंप
HighLights
गोबरदाहा गांव में नल-जल योजना अधूरी, ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे।
पाइप बिछे पर बोरिंग, टंकी न बनने से घरों तक पानी नहीं।
दूषित कुएं के पानी पर निर्भरता, ग्रामीणों में बीमारियों का खतरा।
संवाद सूत्र, चानन (लखीसराय)। Lakhisarai Nal Jal Yojana Pending Crisis News; राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'हर घर नल-जल योजना' लखीसराय जिले के चानन प्रखंड की कुंदर पंचायत स्थित गोबरदाहा कोड़ासी गांव में विभागीय उपेक्षा की शिकार होकर अधर में लटक गई है।
करीब 30 से 40 घरों की आबादी वाले इस छोटे से गांव में घर-घर पानी पहुंचाने का सपना दिखाकर पाइप तो बिछा दिए गए, लेकिन न तो बोरिंग का काम पूरा हुआ और न ही जल भंडारण के लिए टंकी व टावर का निर्माण कराया गया।अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण ग्रामीणों के घरों तक आज तक नल से जल की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
योजना का सही तरीके से रखरखाव न होने के कारण गांव में अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के तहत लगाए गए नल कई जगहों पर पूरी तरह सूखे पड़े हैं, जबकि कुछ दबंग और प्रभावशील लोग बोरिंग के पानी से अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। इस अव्यवस्था के चलते योजना का वास्तविक लाभ उन जरूरतमंद ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है, जो पेयजल के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं।
चानन प्रखंड की कुंदर पंचायत स्थित गोबरदाहा कोड़ासी गांव में पाइप बिछाकर अधूरी छोड़ी गई हर घर नल-जल योजना
टंकी व टावर न बनने से 30–40 घरों की आबादी बूंद-बूंद पानी को मोहताज; नल सूखे, बोरिंग के पानी से हो रही खेतों की सिंचाई
गांव की महिलाएं एकमात्र कुएं से पानी ढोने को मजबूर, दूषित जल के सेवन से ग्रामीणों के बीमार पड़ने की शिकायत
PHED के कनीय अभियंता ने नहीं उठाया फोन, BDO श्रवण कुमार पांडेय बोले- मामले की जानकारी लेकर की जाएगी कार्रवाई

कुएं के दूषित पानी से बीमारी का खतरा, महिलाओं व बुजुर्गों की आफत
पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था न होने से गांव की महिलाओं और बेटियों को प्रतिदिन पानी की आपूर्ति के लिए गांव के एकमात्र कुएं पर निर्भर रहना पड़ रहा है। खुले कुएं के ऊपर ही चापाकल लगाकर जैसे-तैसे पानी निकाला जा रहा है। सिर पर पानी के बर्तन ढोने के कारण बुजुर्गों और बीमार लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस खुले और दूषित पानी का सेवन करने से गांव में कई लोग अक्सर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। योजना के अधूरे काम और दूषित जल पीने की मजबूरी को लेकर ग्रामीणों में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के प्रति गहरा आक्रोश है।
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जेई ने नहीं उठाया फोन, बीडीओ बोले- जल्द ली जाएगी जानकारी
मामले पर विभागीय पक्ष जानने के लिए जब पीएचईडी (PHED) के कनीय अभियंता (JE) के सरकारी मोबाइल नंबर पर कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए चानन के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) श्रवण कुमार पांडेय ने बताया कि गांव में नल-जल योजना की वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी ली जाएगी और यदि काम अधूरा पाया गया या अनियमितता पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों व संवेदक से जवाब-तलब कर त्वरित सुधार कराया जाएगा।
