लखीसराय। प्रत्येक साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। मकसद बच्चों के साथ हो रहे अपराध के लिए लोगों को जागरूक करना होता है। 14 साल से कम उम्र के बच्चों को इस काम से निकाल कर उन्हें शिक्षा दिलाने का उद्देश्य भी होता है। सरकार ने बाल मजदूरी के खिलाफ सख्त कानून बनाया है। बावजूद प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह कानून जिले में कारगर कम फाइलों में अधिक सख्त नजर आता है।

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2020-21 में आठ बाल श्रमिकों को कराया गया विमुक्त

बाल श्रम अधिनियम एवं न्यूनतम मजदूरी अधिनियम को कारगर ढंग से लागू कराने के लिए जिला स्तर पर श्रम अधीक्षक की अध्यक्षता में एक धावा दल का गठन किया गया है। इसमें सभी प्रखंडों के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सदस्य के रूप में काम करते हैं। वहीं लखीसराय जिले में धावा दल धरातल पर प्रभावी रूप से कार्रवाई करने में हांफ रहा है। श्रम विभाग के दावे के अनुसार वर्ष 2020-21में मात्र आठ बाल श्रमिकों को होटल, मिठाई दुकान, चिमनी भट्ठा आदि स्थानों से विमुक्त किया गया है।

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बाल मजदूरी के खिलाफ सख्त है कानून

बाल श्रमिकों से काम कराने वाले नियोजक के विरुद्ध सीजेएम कोर्ट में मुकदमा भी दर्ज किया गया। बावजूद इसके जिले में बाल श्रमिकों से नियोजक काम ले रहे हैं। गत वर्ष बाल श्रम उन्मूलन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आठ नियोजकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। किसी भी नियोजन में 14 वर्ष आयु के बच्चे से काम लेना अपराध की श्रेणी में आता है तथा 14 से 18 वर्ष के किशोर से खतरनाक नियोजन जैसे चिमनी भट्ठा, होटल, गैराज आदि में काम नहीं लिया जा सकता है। पकड़े जाने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना और छह माह तक जेल की सजा का प्रावधान है।

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बाल मजदूरी के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ धावा दल द्वारा कार्रवाई की जाती है। इस वर्ष कोरोना के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई है। जिले में बाल संरक्षण इकाई की देखरेख में चाइल्ड हेल्पलाइन काम कर रहा है। जल्द ही पूरे जिले में बाल श्रमिक उन्मूलन अभियान को कारगर और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कार्रवाई की जाएगी।

घनश्याम रविदास, श्रम अधीक्षक, लखीसराय

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