लखीसराय। लखीसराय का स्वास्थ्य विभाग वैश्विक महामारी कोरोना से मरने वाले लोगों का आंकड़ा छिपा रहा है। इंटरनेट मीडिया पर भी यह बातें आ रही है कि मृतकों के आश्रितों को मुख्यमंत्री राहत कोष से चार लाख रुपये की अनुदान राशि नहीं देना पड़े इसलिए विभाग आंकड़े कम कर रहे हैं। वैसे विभाग इसे तकनीकी समस्या बता रहा है।

सोमवार तक जिले में कोरोना से 72 लोगों की मौत हो चुकी है पर विभागीय बुलेटिन में इसकी संख्या मात्र 32 बताई गई है। विभाग के पास सिर्फ सदर अस्पताल स्थित आइसोलेशन वार्ड में मरने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों का ही आंकड़ा उपलब्ध है। होम आइसोलेशन अथवा यहां से रेफर मरीजों की मौत का आंकड़ा विभाग के पास अब तक एक भी नहीं है। विभाग ने एक भी मृतक के स्वजन को मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं दिया है।

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फॉलोअप नहीं करने के कारण समस्या

होम आइसोलेट कोरोना संक्रमितों के अलावा कंटेन्मेंट जोन का फॉलोअप मोबाइल टीम, एएनएम अथवा आशा कार्यकर्ता के माध्यम से प्रतिदिन किया जाना है। बावजूद ऐसा नहीं हो रहा है। इस कारण मरीजों की मौत की जानकारी विभाग को नहीं पहुंच पाती है। यदि कहीं से सूचना मिलती भी है तो मेडिकल टीम वहां कोरोना जांच करने नहीं पहुंचती है। जिले में अब तक एक भी ऐसा केस सामने नहीं आया है जहां संदिग्ध मरीज की मौत के बाद मेडिकल टीम ने मृतक की कोरोना जांच की हो या फिर अपनी निगरानी में उसकी अंतिम क्रिया कराई हो। ऐसे में ये आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से गायब रहती है।

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केस स्टडी : 01

एक दैनिक समाचार पत्र के जिला संवाददाता कोरोना संक्रमित होकर होम आइसोलेशन में थे। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें विभाग द्वारा चयनित कोविड अस्पताल सुदामा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहां से उन्हें एम्स, पटना रेफर किया गया। वहां तीन मई की अल सुबह उनकी मौत हो गई। पत्रकारों जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर उनके स्वजन को अनुदान राशि उपलब्ध कराने की मांग की। डीएम ने जब संज्ञान लिया तो विभाग के पास मृतकों की सूची में इनका नाम नहीं मिला।

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केस स्टडी : 02

आठ मई को लखीसराय प्रखंड के गढ़ी विशनपुर गांव में 45 वर्षीय संदिग्ध कोरोना संक्रमित महिला की मौत हो गई। मुखिया प्रतिनिधि दिनेश मोदी ने लखीसराय के बीडीओ एवं पीएचसी के मेडिकल अफसर के मोबाइल पर सूचना देकर जांच कराने का अनुरोध किया। देर शाम तक इंतजार करने के बाद भी कोरोना जांच नहीं की गई। अंत में स्वजनों ने दाह संस्कार कर दिया।

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केस स्टडी : 03

सूर्यगढ़ा प्रखंड के कोनीपार निवासी 32 वर्षीय एक युवक की सदर अस्पताल में निबंधन कराने के दौरान इसी सप्ताह निधन हो गया। अस्पताल प्रशासन से बार-बार गुहार कराने के बाद भी उसकी कोरोना की जांच नहीं कराई गई। अंत में स्वजन ऐसे ही शव लेकर घर चले गए।

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केस स्टडी : 04

सदर अस्पताल स्थित आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रामगढ़ चौक प्रखंड अंतर्गत नोनगढ़ निवासी 45 वर्षीय कोरोना संक्रमित व्यक्ति रविवार को भूख से तंग आकर भाग गया। वह अपने घर पहुंचा और शाम में उसकी मौत हो गई। भागने और मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने उस मरीज की खोजबीन नहीं की।

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केस स्टडी : 05

पिछले सप्ताह सूर्यगढ़ा की एक कोरोना संक्रमित महिला मरीज को सदर अस्पताल से भागलपुर रेफर किया गया। वहां जाने के दौरान रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। शव को वापस घर लाकर स्वजन ने दाह संस्कार कर दिया। विभाग इससे भी अनजान है।

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कोरोना संक्रमित मरीज की मौत जहां होती है वहां से या फिर पीएचसी स्तर से मौत की सूचना समय से नहीं मिल पाने के कारण मृतकों के आंकड़े में अंतर हो सकता है। होम आइसोलेशन में मरने वाले कोरोना संक्रमित लोगों का अंकड़ा संबंधित पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

डॉ. डीके चौधरी, सिविल सर्जन, लखीसराय।

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होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों का फॉलोअप नहीं कराने के मामले की जांच होगी। रेफर एवं होम आइसोलेट मरीजों की मौत का आंकड़ा विभाग के पास क्यों नहीं है, यह तो लापरवाही है। संदिग्ध कोरोना संक्रमित के मरने पर दाह संस्कार से पहले शव की कोरोना जांच हर हाल में होनी चाहिए। सीएस के साथ इसकी समीक्षा करूंगा।

संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी, लखीसराय।